दिल्ली दंगा मामले में एक बड़ा फैसला सामने आया है। आगजनी और दंगाई भीड़ का हिस्सा होने के आरोप में गिरफ्तार किए गए फैजान को अदालत ने बरी कर दिया है।
कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय सबूत पेश करने में नाकाम रहा। केवल आरोप या शक के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
मामला उस दौरान का है जब उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई थीं। पुलिस ने दावा किया था कि फैजान दंगाई भीड़ का हिस्सा था और उसने उपद्रव में भाग लिया। हालांकि, सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान और घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों में कई विरोधाभास सामने आए।
अदालत ने कहा कि पहचान की प्रक्रिया और प्रत्यक्ष सबूत पर्याप्त नहीं थे। वीडियो फुटेज और गवाहों की गवाही में स्पष्टता की कमी पाई गई, जिसके चलते संदेह का लाभ आरोपी को दिया गया।
कोर्ट ने यह भी दोहराया कि आपराधिक मामलों में दोष सिद्ध करने की जिम्मेदारी अभियोजन पक्ष की होती है और जब तक आरोप संदेह से परे साबित न हों, तब तक सजा नहीं दी जा सकती।
इस फैसले के बाद एक बार फिर दिल्ली दंगा मामलों की जांच और सबूतों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। वहीं बचाव पक्ष ने इसे न्याय की जीत बताया है, जबकि अभियोजन पक्ष आगे की कानूनी कार्रवाई पर विचार कर सकता है।
दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपी फैजान बाइज्जत बरी अदालत में पुलिस की कार्य प्रणाली पर….






