लोकसभा में आज जब “ऑपरेशन सिंदूर” और पहलगाम आतंकी हमले पर बहस की तैयारी हो रही थी, तब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष को सख्त लेकिन संयमित अंदाज़ में आगाह किया। उन्होंने खासतौर पर कांग्रेस से अपील करते हुए कहा कि संसद की बहस में ‘लक्ष्मण रेखा’ पार न हो। रिजिजू ने जोर देकर कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर बयानबाज़ी सोच-समझकर की जानी चाहिए, ताकि पाकिस्तान या दुश्मन ताकतें भारत के नेताओं की बातों का अपने पक्ष में इस्तेमाल न कर सकें। उन्होंने याद दिलाया कि जब पाकिस्तान ने भारत की सीमा लांघी थी, तब हमारे जवानों ने उसके आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया था – ये वही देश है जहां रावण जैसी हर सीमा पार करने पर लंका जलती है।
इस बीच कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम के एक इंटरव्यू ने संसद से पहले ही सियासी तापमान बढ़ा दिया। चिदंबरम ने पहलगाम हमले को लेकर सवाल उठाए कि क्या सच में आतंकी पाकिस्तान से आए थे? उन्होंने शक जताया कि इसमें घरेलू तत्व भी शामिल हो सकते हैं। साथ ही उन्होंने एनआईए की जांच और ऑपरेशन सिंदूर में हुए नुकसान की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह युद्ध जैसी स्थिति में अपने नुकसान छुपा रही है, जबकि ब्रिटेन जैसे देश हर दिन का ब्योरा देते हैं। बीजेपी ने इन बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी और कांग्रेस पर एक बार फिर पाकिस्तान के सुर में बोलने का आरोप लगाया।






