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चित्रकूट स्व -गणना का प्रचार प्रसार अधिक से अधिक कराया जाए….

ब्यूरो संजय मिश्रा
चित्रकूट -जिलाधिकारी चित्रकूट पुलकित ने आम जनमानस को स्व गणना में बढ़ चढ़ कर लेने की बात कही है। डीएम ने मीडिया बन्धुओं से अपील की है कि स्व गणना का प्रसार प्रचार अधिक से अधिक कराया जाए जिससे कि जनपद में अधिक से अधिक स्व गणना कराया जाए।भारत की जनगणना अपनी समृद्ध परंपरा के कारण विश्व की सर्वश्रेष्ठ जनगणनाओं में से एक मानी जाती है तथा यह विश्व के सबसे बड़े प्रशासनिक कार्यों में शामिल है। जनगणना भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के संघ सूची [अनुच्छेद 246] में क्रम संख्या 69 पर अंकित है तथा जनगणना अधिनियम, 1948 इसके संचालन का विधिक आधार प्रदान करता है।भारत में प्रथम जनगणना वर्ष 1872 में कराई गई थी, जो देश के विभिन्न भागों में अलग-अलग समय पर संपन्न हुई। वर्ष 1881 में पहली बार संपूर्ण देश में एक साथ जनगणना कराई गई। इसके पश्चात 2011 तक प्रत्येक दस वर्ष में बिना किसी व्यवधान के जनगणना होती रहीभारतीय जनगणना जनसांख्यिकी ( जनसंख्या की विशेषताएं) आर्थिक गतिविधि, साक्षरता एवं शिक्षा, आवास एवं घरेलू सुविधाएं, शहरीकरण, प्रजनन, भाषा, धर्म, दिव्यांगता तथा अन्य अनेक सामाजिक, सांस्कृतिक एवं जनसांख्यिकी आंकड़ों का सबसे विश्वसनीय स्रोत है जिससे कि जनगणना से प्राप्त सूचनाएं देशवासियों के लाभ के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को बनाने के लिए आवश्यक आधारभूत स्तर की जानकारी प्रदान करती है। जनगणना के आंकड़ों के आधार पर संसद/ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों, पंचायतों एवं अन्य स्थानीय निकायों की सीटों का परिसीमन किया जाता है। इस प्रकार, प्रगणक केवल जानकारी एकत्र नहीं कर रहे होते, बल्कि वे एक विशाल राष्ट्र निर्माण गतिविधि का अभिन्न अंग होते हैं। इस प्रकार 2027 में पहली बार स्व-गणना पद्धति भी प्रारंभ की जा रही है।इसी क्रम में जिले भर में गत सात मई से जनगणना 2027 के लिए स्व -गणना कार्य क्रम चल रहा है। स्व-गणना अभियान आगामी इक्कीस मई तक चलेगा। इसके लिए जनपदवासी स्वयं भी जनगणना पोर्टलhttps://se.census.gov.in जाकर अपनी सूचनाएं दर्ज करा सकते हैं।

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