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जीवित किसान को मृत दिखाकर खोली विरासत, राजस्व विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर उपशीर्षक

रिपोर्टर पप्पू लाल पंचोली
शीर्षक:

फुलिया कला तहसील में नामांतरण की त्रुटि से दलित कृषक की जमीन दूसरे के नाम दर्ज, कार्रवाई की मांग
फुलिया कला :-
राजस्व विभाग की गंभीर लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला फुलिया कला तहसील क्षेत्र में सामने आया है, जहां एक जीवित किसान को मृत दर्शाकर उसकी कृषि भूमि की विरासत खोल दी गई। मामला ग्राम धनोप निवासी मोहन पुत्र हरदेव बेरवा से जुड़ा है, जिनकी कृषि खाता संख्या 195 की करीब 1.61 हेक्टेयर भूमि को गलत तरीके से नामांतरण संख्या 2813 दिनांक 7 अक्टूबर 2025 के तहत अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज कर दिया गया।
घटना का खुलासा तब हुआ जब मंगलवार को मोहन बेरवा अपने कार्य हेतु ई-मित्र से भूमि की नकल निकलवाने पहुंचे। नकल में स्वयं को मृत दर्शाकर भूमि का नामांतरण किसी अन्य के नाम देख उनके होश उड़ गए और उनकी तबीयत बिगड़ गई। यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि एक दलित किसान के अधिकारों पर भी गंभीर चोट है।
जानकारी के अनुसार, संबंधित नामांतरण पटवारी हल्का धनोप के पटवारी मुकेश कुमार करिवाल द्वारा खोला गया। इस संबंध में पटवारी ने सफाई देते हुए बताया कि गांव में एक ही नाम और पिता के नाम समान होने के कारण मानवीय भूलवश गलत व्यक्ति की विरासत खोल दी गई।
वहीं, तहसीलदार रामदेव धाकड़ ने बताया कि यह नामांतरण ई-मित्र के माध्यम से ऑनलाइन दूसरे मोहन के परिवार द्वारा करवाया गया, जिसमें त्रुटि हो गई। उन्होंने कहा कि नियमानुसार 90 दिन के भीतर शुद्धिकरण संभव होता है, लेकिन समय सीमा निकलने के बाद अब उपखंड न्यायालय में अपील के जरिए ही सुधार किया जा सकेगा।
इस पूरी घटना से पीड़ित किसान को अब न्याय के लिए न्यायालय के चक्कर काटने पड़ेंगे, जिससे उसका समय और धन दोनों व्यर्थ होंगे। सवाल यह उठता है कि विभागीय लापरवाही का खामियाजा आखिर किसान क्यों भुगते?
पीड़ित किसान ने दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए प्रशासन से जल्द न्याय दिलाने की गुहार लगाई है।

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