दरअसल, विपक्ष मतदाता पुनरीक्षण कार्य शुरू होने के बाद से ही चुनाव आयोग और केंद्र सरकार का विरोध कर रहा है। एक अगस्त को मतदाता सूची प्रारूप का प्रकाशन किया गया था। शनिवार को बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी ने प्रेस वार्ता की। इस दौरान उन्होंने अपना मतदाता पहचान पत्र सार्वजनिक किया। इसके बाद उन्होंने चुनाव आयोग के एप पर ऑनलाइन मतदाता प्रारूप सूची में अपना ईपीआईसी नंबर डालकर सार्वजनिक रूप से नाम खोजने की कोशिश की, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं मिला। तेजस्वी ने कहा कि नई मतदाता सूची प्रारूप में उनका नाम ही नहीं है। अब वे चुनाव कैसे लड़ेंगे। चुनाव लड़ने के लिए मतदाता सूची में आपका नाम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके साथ-साथ बिहार के लाखों गरीबों के साथ अन्याय हुआ है। हम पहले भी कह रहे थे कि चुनाव आयोग गलत कर रहा है। इसका परिणाम सबके सामने है। हालांकि, तुरंत बाद ही निर्वाचन आयोग ने सबूत के साथ आरोपों का खंडन कर दिया।
ALSO READ : https://expressnewslive.tv/i-will-not-become-a-king-i-will-remain-a-servant-of-the-people-rahul/
लेकिन कुछ ही देर बाद चुनाव आयोग ने पलटवार करते हुए तेजस्वी के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने सबूत के तौर पर एक सूची जारी की, जिसमें तेजस्वी यादव का नाम 416वें नंबर पर साफ तौर पर मौजूद था — फोटो के साथ। आयोग ने कहा कि तेजस्वी का बयान “झूठा और भ्रामक” है और यह लोकतंत्र को गुमराह करने वाला है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर मतदाता सूची की पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया पर बहस छेड़ दी है। सवाल सिर्फ एक नेता के नाम का नहीं, बल्कि उस भरोसे का है, जो हर नागरिक लोकतंत्र की नींव में रखता है।






