महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। एनसीपी के संभावित विलय को लेकर शरद पवार का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर अजित पवार की कोई इच्छा है, तो उसे पूरा होना चाहिए। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर तेज हो गया है।दरअसल, 12 फरवरी को एनसीपी के दोनों गुटों के विलय को लेकर एक बड़ा एलान होने की चर्चा थी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, मंच भी लगभग तैयार था और कार्यकर्ताओं को संकेत मिल चुके थे कि कोई महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकता है। लेकिन आखिरी समय पर कार्यक्रम टल गया, जिससे सवाल और भी गहरे हो गए हैं।शरद पवार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पार्टी और कार्यकर्ताओं के हित सबसे ऊपर हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर संगठन मजबूत होता है और विचारधारा सुरक्षित रहती है, तो किसी भी विकल्प पर विचार किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर विलय की पुष्टि नहीं की।वहीं, अजित पवार खेमे की ओर से भी सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि दोनों पक्षों के बीच बैकडोर बातचीत जारी है। महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए यह कदम रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर एनसीपी का विलय होता है तो इसका सीधा असर राज्य की सत्ता समीकरणों पर पड़ेगा। खासकर लोकसभा और आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला निर्णायक साबित हो सकता है।फिलहाल सबकी निगाहें अगली तारीख और आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं। क्या 12 फरवरी के बाद नई तारीख तय होगी? क्या पवार परिवार एक बार फिर एकजुट नजर आएगा? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में साफ हो सकते हैं।






