ब्यूरो संजय मिश्रा
चित्रकूट। जिले में अवैध गांजा कारोबार को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली कटघरे में है। सोशल मीडिया पर कार्रवाई के दावे जरूर किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। स्थिति यह है कि अब तक अवैध रूप से भांग की दुकानों की आड़ में गांजा बेचने वाले ठेकेदारों और कारोबारियों पर न तो कोई ठोस कार्रवाई हुई है और न ही किसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।नाम न छापने की शर्त पर स्थानीय लोगों का कहना है कि ठेकेदार पहले से ही पूरा “सिस्टम” सेट कर कारोबार चला रहे हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब सब कुछ तयशुदा तरीके से संचालित हो रहा है, तो कार्रवाई आखिर होगी कैसे?
जिला मुख्यालय में अवैध गांजा व्यापार के खुलासे के बाद प्रशासन की निष्क्रियता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। बस अड्डा क्षेत्र और इलाहाबाद रोड पर गुमटियां लगाकर खुलेआम गांजा बेचा जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि कोतवाली कर्वी और आबकारी विभाग का कार्यालय इन स्थानों से चंद कदमों की दूरी पर स्थित है, इसके बावजूद यह अवैध कारोबार बेरोकटोक जारी है।
स्थानीय लोगों के अनुसार बस अड्डे के आसपास कुछ दुकानों की आड़ में गांजा बेचा जा रहा है, जबकि इलाहाबाद रोड पर डिब्बेनुमा गुमटी में खुलेआम नशे का धंधा फल-फूल रहा है। नशा मुक्ति अभियान चलाने वाले अधिकारियों को यह सब दिखाई न देना आमजन के आक्रोश को और भड़का रहा है।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अवैध गांजा व्यापार ने जिले के नाबालिग बच्चों और युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। गांजा आसानी से उपलब्ध होने के कारण युवा तेजी से नशे की दलदल में फंसते जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि गांजे की कीमत 30 रुपये से लेकर 200 रुपये तक है, जिससे यह हर वर्ग की पहुंच में है।सूत्रों के मुताबिक जिले में मुख्यालय से लेकर गांव कस्बों तक ज्यादातर भांग विक्रेताओं ने बिना लाइसेंस अलग-अलग स्थानों पर दुकानें खोल रखी हैं, जहां गांजा माफिया सक्रिय है। इन दुकानों पर न तो किसी तरह का डर है और न ही कार्रवाई का भय। इससे आबकारी विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जनपद के स्थानीय लोगों का आरोप है कि आबकारी विभाग की निष्क्रियता या संरक्षण के चलते यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। कोतवाली और विभागीय कार्यालय के पास खुलेआम गांजा बिकना प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या जिम्मेदार अधिकारी भी कहीं न कहीं इस खेल में शामिल हैं? इन सवालों के जवाब अब जनता जानना चाहती है।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध गांजा कारोबार में लिप्त लोगों पर तत्काल और सख्त कार्रवाई की जाए तथा जिले को नशा मुक्त बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। आमजन का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाली पीढ़ी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है।
चित्रकूट -जनपद में मुख्यालय से गांव कस्बों में अवैध गांजा कारोबार धड़ल्ले से जारी, प्रशासनिक तंत्र पर उठे गंभीर सवाल






