(रिपोर्ट-नेहाल अख्तर)
(Express news bharat)
(जिला संवाददता बलिया)
रसड़ा (बलिया)। इस्लामी कैलेंडर के अनुसार शब-ए-बरात शाबान माह की 14 तारीख को मनाया जाता है। इस्लाम धर्म के मानने वाले पूरी रात इबादत करते हुए नवाफिल नमाज के साथ तिलावत करते गुजारते हैं। मस्जिदों और कब्रिस्तानों को कुमकुमों से सजाया जाता है। कब्रस्तिानों पर पहुंच कर दुनिया से रुखसत हो चुके लोगों की मगफिरत की दुआ करते हैं। गरीबों के बीच खाना व जकात-सदका दिया जाता है। पूरे जिले में शब-ए-बारात धार्मिक रूप से मनाया जाता है। मंगलवार की पूरी रात लोग जाग कर इबादत करेंगे। मस्जिदों से लेकर घरों तक नवाफिल नमाजों के साथ कुरआन पाक की तिलावत का सिलसिला जारी रहता हैं।
कहा जाता है इस रात की इबादत से अल्लाह राजी होता है। लोगों की गुनाहों को माफ करता है। इबादत के साथ कब्रिस्तानों में पहुंच कर लोग दुनिया छोड़ चुके लोगों के हक में दुआ करते हैं। कि तमाम रातों में शब-ए-बारात की रात अफजल है। अल्लाह लोगों की दुआ कुबूल फरमाता है।हाजी जनाब एकबाल अहमद ने बताया कि इस्लामिक मान्यता है कि बीते वर्ष किए गए कर्मों का लेखा-जोखा तैयार करने और आने वाले साल की तकदीर तय करने वाली इस रात को शब-ए-बह्यरात कहा जाता है। इस रात को पूरी तरह इबादत में गुजारने की परंपरा है। नमाज, तिलावत-ए-कुरआन, कब्रिस्तानों में अपने पूर्वजों व अपने बीच जो इस संसार से जा चुके हैं उनकी क़ब्रों की सफाई और रोशनी की जाती है। हैसियत के मुताबिक ख़ैरात करना इस रात का अहम काम है। इस मौके पर रसड़ा नगर पालिका परिषद के पूर्व अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सोनी, पूर्व सभासद मनैव्वर अली, दाऊद अहमद अंसारी,एखलाक कुरैशी,मुख़्तार अहमद, शौकत अली अन्य लोग उपस्थित रहे।






