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“चर्च बंद करने के नोटिस पर मसीही समाज का आक्रोश, कलेक्ट्रेट में शिकायत”

अशोक कुमार श्रीवास की रिपोर्ट
जांजगीर चांपा जिला के कई थाना प्रभारीयों द्वारा आराधना एव चर्चो को बंद करने का भेजा नोटिस जिससे शांतिप्रिया मसीही समाज में आक्रोश, संयुक्त मसीही समाज एवं चर्च वेलफेयर सोसाइटी पहुंचे जिला कलेक्ट्रेट
छत्तीसगढ़: जांजगीर–चांपा//
जांजगीर चांपा चर्च वेलफेयर सोसाइटी द्वारा जिला कलेक्टर को एक महत्वपूर्ण आवेदन सौंपा गया है, जिसमें जिले में चर्च की धार्मिक गतिविधियों एवं प्रार्थना सभाओं के निर्बाध संचालन हेतु प्रशासनिक अनुमति प्रदान करने की मांग की गई है। यह आवेदन 10 नवंबर 2025 को जिला कार्यालय में जमा किया गया था। संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लेख करते हुए सोसाइटी ने स्पष्ट किया कि वे अपने धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संचालित करते आ रहे हैं।

सोसाइटी ने बताया कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 तक प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन, प्रचार और प्रसार करने का अधिकार प्राप्त है। इन संवैधानिक अधिकारों के आधार पर चर्च में प्रार्थना सभा, आराधना, बाइबल अध्ययन, उपासना गीत तथा पारिवारिक संगति जैसी गतिविधियाँ नियमित रूप से संचालित की जाती रही हैं, जो पूरी तरह सौहार्दपूर्ण और शांतिपूर्ण माहौल में होती हैं।

➤ पुलिस नोटिस एवं आराधनाओं पर रोक से समाज में बढ़ी चिंता, शांति प्रिया जीवन व्यतीत करने वाली मसीहियो में दिखा आक्रोश

आवेदन में यह गंभीर मुद्दा भी उठाया गया कि हाल के दिनों में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से अलग-अलग पुलिस थानों द्वारा कई चर्चों एवं मसीही समाज के लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। इन नोटिसों में स्पष्ट उल्लेख किया गया है चर्च और अराधना बंद करने का शासन प्रशासन से अनुमति प्राप्त किए बिना किसी भी प्रकार की आराधना या धार्मिक सभा नहीं की जा सकती, अन्यथा दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इन्हीं नोटिसों के आधार पर कई स्थानों पर शांतिपूर्ण ढंग से चल रही आराधनाओं को पुलिस द्वारा रोक दिया गया, जिसके कारण मसीही समाज में भय, असुरक्षा और आक्रोश की स्थिति बन गई है। सोसाइटी ने कहा कि यह परिस्थितियाँ धार्मिक स्वतंत्रता के मूल अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं।

➤ संविधान दिवस (26 नवंबर) पर कलेक्ट्रेट पहुँचकर समाज ने रखी अपनी बात

संविधान दिवस 26 नवंबर के अवसर पर बड़ी संख्या में मसीही समाज के लोग चर्च पास्टर जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और संयुक्त कलेक्टर से मिलकर इस पूरे विषय पर विस्तार से चर्चा की। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि:

वे वर्षों से शांतिपूर्ण तरीके से आराधना करते आ रहे हैं।

सभी कार्यक्रम खुले स्थानों पर, पूर्ण जानकारी और पारदर्शिता के साथ आयोजित किए जाते हैं।

किसी प्रकार की अवैध या आपत्तिजनक गतिविधि नहीं की जाती।

मसीही समाज ने बताया कि अचानक से नोटिस जारी करके धार्मिक गतिविधियों को प्रतिबंधित करना संविधान की भावना के विरुद्ध है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए आराधनाओं के संचालन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

➤ कलेक्टर से सुरक्षा व स्पष्ट अनुमति जारी करने का अनुरोध

चर्च वेलफेयर सोसाइटी ने जिला कलेक्टर से निम्नलिखित मांगें रखीं:

  1. धार्मिक गतिविधियों और प्रार्थना सभाओं के लिए स्पष्ट प्रशासनिक अनुमति प्रदान की जाए।
  2. शांतिपूर्ण कार्यक्रमों में अनावश्यक हस्तक्षेप बंद कराया जाए।
  3. आराधना स्थलों पर मौजूद पादरियों, सदस्यों एवं आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु स्थानीय पुलिस को उचित निर्देश दिए जाएं।
  4. संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा की जाए।

➤ शांति और सद्भाव बनाए रखने की प्रतिबद्धता

अंत में सोसाइटी ने कहा कि मसीही समाज हमेशा जिले में शांति, सद्भाव और सामाजिक एकता का वातावरण बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन उनकी संवैधानिक मांगों का सम्मान करते हुए आवश्यक कदम उठाएगा।

आवेदन पर चर्च वेलफेयर सोसाइटी के पदाधिकारियों एवं सदस्यों द्वारा संयुक्त हस्ताक्षर किए गए और इसे औपचारिक रूप से जिला प्रशासन को सौंपा गया।

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