उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। इस मामले में अब कथित वीआईपी के खिलाफ औपचारिक रूप से मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। शिकायतकर्ता कोई और नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए पद्मभूषण से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता अनिल प्रकाश जोशी हैं, जिन्होंने मामले में निष्पक्ष जांच और कानून के तहत कार्रवाई की मांग को लेकर पुलिस का दरवाजा खटखटाया।सूत्रों के अनुसार, जोशी ने अपनी शिकायत में कहा है कि अंकिता भंडारी की मौत के पीछे केवल रिजॉर्ट प्रबंधन ही नहीं, बल्कि एक प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका की लगातार चर्चा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच के दौरान उस कथित वीआईपी की पहचान और भूमिका को जानबूझकर सार्वजनिक नहीं किया गया, जिससे पीड़िता और उसके परिवार को न्याय मिलने में बाधा उत्पन्न हुई।पुलिस ने अनिल प्रकाश जोशी की शिकायत को गंभीर मानते हुए मामला दर्ज कर लिया है और अब इस पहलू की दोबारा कानूनी पड़ताल शुरू की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि FIR दर्ज होने के बाद सभी तथ्यों, कॉल रिकॉर्ड्स, गवाहों के बयानों और पहले की जांच से जुड़े दस्तावेजों को फिर से खंगाला जाएगा।इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि शुरू से ही इस मामले में प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की गई, जबकि सरकार का कहना है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।अंकिता भंडारी की हत्या ने देशभर में आक्रोश पैदा किया था और अब कथित वीआईपी के खिलाफ केस दर्ज होने से एक बार फिर उम्मीद जगी है कि पूरे मामले की परतें खुलेंगी। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी ताकि पीड़िता को न्याय और जनता को सच्चाई मिल सके।






