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जामिया इस्लामिया फ़ैज़ुस्सत्तर नाफ़ेउल उलूम में यादगार भाषण प्रतियोगिता, छोटे छात्रों ने बौद्धिक क्षमता से सबको किया प्रभावित

अकरम अली

गागलहेडी! ढाला चोरा जामिया इस्लामिया फ़ैज़ुस्सित्तर नाफ़ेउल उलूम, ढाला चोरा में आयोजित भाषण प्रतियोगिता एक यादगार, कामयाब और मिसाली प्रोग्राम साबित हुई। प्रोग्राम हज़रत क़ारी मुहम्मद सालिम साहब काशिफ़ी (बानी व मोअस्सिस इदारा फ़लाहुल बनात, सहारनपुर) की सरपरस्ती में बहुत अच्छे इंतज़ाम और अनुशासन के साथ संपन्न हुआ।
प्रोग्राम की शुरुआत जामिया के छात्र मुहम्मद फ़रहान की तिलावत से हुई, इसके बाद हाफ़िज़ मुहम्मद असअद ने नबी करीम ﷺ की बारगाह में अकीदत व मुहब्बत के साथ नात शरीफ़ पेश की,
इसके बाद नाज़िम-ए-जलसा मौलाना मुहम्मद ज़ुबैर क़ासमी ने इस्तिक़बाली कलाम पेश करते हुए प्रतियोगिता के मक़ासिद पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि इस तरह के इल्मी और तर्बियती प्रोग्राम छात्रों में ख़ुद-एतिमादी, सही सोच, बोलने की सलाहियत और दीन की दावत का जज़्बा पैदा करते हैं, और जामिया इस तरह के प्रोग्राम के ज़रिए छात्रों की हर पहलू से तरबियत कर रहा है।
इस भाषण प्रतियोगिता में तीन दर्जन से ज़्यादा होनहार छात्रों ने हिस्सा लिया। खास बात यह रही कि नाज़िरा और हिफ़्ज़ के कम उम्र छात्रों ने पुख़्तगी और बेहतरीन अंदाज़ में तक़रीरें पेश कीं, जिसे देखकर लोगों ने खूब तारीफ की। छात्रों की यह कारगुज़ारी जामिया के तालीमी माहौल और असातिज़ा की मेहनत का साफ़ सबूत थी।
इस इल्मी मुकाबले में जज के तौर पर मौलाना मुहम्मद अतहर हक़्क़ानी साहब (सदर जमीयत उलमा-ए-हिंद, शहर सहारनपुर), मौलाना शमशाद अहमद साहब (नाज़िम आला, जामिया क़ासिमुल उलूम, गागलहेड़ी) और मौलाना मुहम्मद असलम साहब काशिफ़ी (इमाम व ख़तीब, रज़ा पुर मस्जिद) मौजूद रहे। उन्होंने पूरी ईमानदारी और इल्मी पैमाने पर तमाम तक़रीरों का जायज़ा लेकर नंबर अता किए।
नतीजों के बाद जज अव्वल मौलाना मुहम्मद अतहर हक़्क़ानी साहब ने अपने ख़िताब में छात्रों की सलाहियत की खुलकर तारीफ़ की। उन्होंने असातिज़ा की दिन-रात मेहनत को सराहा और बानी-ए-मदरसा हजरत अलहाज हाफिज मोहम्मद यामीन साहब के किरदार को क़ाबिल-ए-तारीफ़ बताया। साथ ही जामिया की तरक़्क़ी और छात्रों की कामयाबी के लिए ख़ास दुआ भी की।
इसके बाद मौलाना शमशाद अहमद साहब ने कहा कि आम तौर पर जिस तरह का इल्मी और फ़िक्री काम आला दर्जों के छात्र करते हैं, वही काम आज यहाँ नन्हे छात्रों ने करके दिखा दिया है, जो इस इदारे के ऊँचे तालीमी मेयार और असातिज़ा की सच्ची मेहनत का ज़िंदा नमूना है। उनके इस बयान से मजलिस में खुशी और इत्मीनान का माहौल और गहरा हो गया।
प्रोग्राम के दौरान तमाम छात्रों ने पूरे इत्मीनान, रवानी और असरदार अंदाज़ में अपनी तक़रीरें पेश कीं, जिस पर हाज़िरीन बार-बार दाद देने पर मजबूर हो गए। इस मौके पर करीब डेढ़ सौ आम लोग, दो दर्जन से ज़्यादा इमाम हज़रात, दो सौ से अधिक छात्र और बड़ी संख्या में बच्चों के माता-पिता मौजूद रहे। अपने बच्चों की कामयाबी देखकर बेहद खुश हुए।
आख़िर में जामिया के नाजिम मौलाना मुहम्मद हुसैन साहब ने जजों के फ़ैसले के मुताबिक़ कामयाब छात्रों के नामों का ऐलान किया। पहली पोज़ीशन मुहम्मद फ़रहान सहारनपुरी, दूसरी मुहम्मद अरसलान बीरी ज़मां, तीसरी मुहम्मद अबूज़र चक हरेनटी, चौथी अब्दुल अहद रायपुरी, पाँचवीं मुहम्मद अमान कांकरकुई और छठी मुहम्मद हनज़ला जमाली ने हासिल की।
कामयाब छात्रों को मास्टर रियाज़ अहमद साहब, हाफ़िज़ मास्टर एहसान साहब, क़ारी मुहम्मद सालिम साहब, हाजी मुहम्मद रियाज़ साहब और अन्य मेहमानों के हाथों ट्रॉफी और इनामात दिए गए। इसके अलावा जज हज़रात को भी एहतिरामी अवॉर्ड पेश किए गए। तमाम शिरकत करने वाले छात्रों की हौसलाअफ़ज़ाई के लिए तोहफ़े भी दिए गए।
प्रोग्राम के आख़िर में मौलाना मुहम्मद हुसैन साहब ने तमाम उलमा, इमाम हज़रात, और मेहमानों का दिल से शुक्रिया अदा किया। अंत में हज़रत क़ारी मुहम्मद इरशाद साहब, मोहतमिम जामिया की दुआ पर यह प्रोग्राम खत्म हुआ!

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