दिल्ली:
हाल ही में देश के कुछ प्रमुख मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित किया जा रहा है। इस वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि ‘अली’ नामक व्यक्ति ने दिल्ली में फ़ैज़‑ए‑इलाही मस्जिद से जुड़े मामले में भड़काऊ वीडियो बनाकर दंगा भड़काया।
लेकिन क्या यह दावा सच है? एक्सप्रेस न्यूज़ भारत की गहन पड़ताल में इस पूरे मामले की सच्चाई कुछ और ही सामने आई है।
वायरल वीडियो की सच्चाई क्या है?
एक्सप्रेस न्यूज़ भारत ने वायरल वीडियो की डिजिटल फ़ॉरेंसिक जाँच और टाइमलाइन का विश्लेषण किया। जाँच में सामने आया कि:
- जिस वीडियो को हालिया दिल्ली हिंसा से जोड़ा जा रहा है, वह वीडियो नया नहीं है
- यह वीडियो अली के इंस्टाग्राम अकाउंट
ali_khan_78697से 29 सितंबर 2025 को पोस्ट किया गया था - वीडियो की तारीख और हालिया घटना की तारीखों में स्पष्ट अंतर है

घटना के समय अली कहाँ था?
- जिस रात दिल्ली में कथित रूप से पत्थरबाज़ी और तनाव की घटना हुई
- उस समय अली दिल्ली में मौजूद नहीं था
- विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, अली उस वक्त मनाली में था
इस तथ्य से यह दावा स्वतः ही संदिग्ध हो जाता है कि अली ने मौके पर या उसी समय दंगा भड़काया।
फिर सवाल उठता है मीडिया की भूमिका पर
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि:
- क्या बिना तथ्यों की पुष्टि के किसी पुराने वीडियो को नए घटनाक्रम से जोड़ना सही है?
- क्या देश के बड़े मीडिया संस्थानों की यह ज़िम्मेदारी नहीं बनती कि वे तारीख, स्थान और संदर्भ की जाँच करें?
- क्या अफ़वाहों और अधूरी जानकारी को परोसना देश के चौथे स्तंभ की साख पर सवाल नहीं खड़ा करता?

निष्कर्ष
एक्सप्रेस न्यूज़ भारत की पड़ताल में यह साफ़ हो गया है कि:
- वायरल वीडियो को लेकर किए जा रहे दावे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं
- वीडियो पुराना है और उसका हालिया दिल्ली घटनाक्रम से सीधा कोई संबंध सिद्ध नहीं होता
- इस तरह की रिपोर्टिंग से समाज में भ्रम और तनाव फैलने की आशंका बढ़ जाती है
ज़रूरत है ज़िम्मेदार पत्रकारिता की – न कि सनसनी और अफ़वाहों की।




