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चित्रकूट -43 करोड के ट्रेजरी घोटाले में बड़ा मोड़, बिना भुगतान महिला आरोपी को हाईकोर्ट से राहत

ब्यूरो संजय मिश्रा
चित्रकूट। यह मामला सिर्फ जमानत का नहीं, बल्कि ट्रेजरी घोटाले की परतें खोलने वाला एक अहम मोड़ बनकर सामने आया है। करोड़ों रुपये के सरकारी धन की अनियमित अदायगी से जुड़े चर्चित ट्रेजरी घोटाले में अभियुक्ता लक्ष्मी देवी को माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद से नियमित जमानत मिलना पूरे मामले में नई बहस को जन्म दे गया है। दिनांक 28 जनवरी 2026 को लक्ष्मी देवी की जमानत याचिका पहली बार उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत हुई, जिसमें उनके खाते में ट्रेजरी से एक करोड़ इक्कीस लाख सत्रह हजार तीन सौ तिरपन रुपये की कथित अनियमित भुगतान राशि का गंभीर आरोप था। सुनवाई के दौरान याची की ओर से युवा अधिवक्ता क्रांति किरण पांडेय ने प्रभावशाली ढंग से तर्क रखते हुए न्यायालय को अवगत कराया कि भले ही यह धनराशि अभियुक्ता के खाते में आई हो, लेकिन लक्ष्मी देवी स्वयं इस भुगतान से पूर्णतः अनजान थीं। उन्होंने बताया कि अभियुक्ता मात्र हस्ताक्षर कर सकती हैं और इतनी शिक्षित नहीं हैं कि खाते के लेन-देन को पढ़ या समझ सकें। अधिवक्ता का यह भी कहना था कि पूरे प्रकरण में खाते का इस्तेमाल तो लक्ष्मी देवी के नाम पर हुआ, लेकिन उसका संचालन किसी अन्य व्यक्ति या उनके पुत्र दीपक द्वारा किया गया। अदालत में प्रस्तुत इन तथ्यों और तर्कों के आधार पर न्यायालय ने पहली ही सुनवाई में अभियुक्ता को नियमित जमानत प्रदान कर दी। उल्लेखनीय है कि चित्रकूट के इसी ट्रेजरी घोटाले में अभियुक्ता जोगवा को जहां केवल अंतरिम जमानत मिली है, वहीं अभियुक्त बलवंत को धनराशि जमा करने के बाद ही राहत नसीब हुई। ऐसे में लक्ष्मी देवी अब तक की पहली महिला अभियुक्ता बन गई हैं, जिन्हें बिना किसी राशि के भुगतान के सीधे नियमित जमानत मिली है। यह आदेश न केवल कानून की बारीकियों को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि आखिर करोड़ों की सरकारी रकम किन हाथों से और कैसे ठिकाने लगाई गई। बताते चलें कि इसी घोटाले में पहला स्टे भी अधिवक्ता क्रांति किरण पांडेय की प्रभावी बहस पर ही मिला था, जो आज भी कई फाइलों में सक्रिय है और अनेक अभियुक्तों को राहत पहुंचा चुका है।

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