अशोक कुमार श्रीवास की रिपोर्ट
कोरबा//जिले के अंतिम छोर पर स्थित जांजगीर-चांपा सीमावर्ती ग्राम रींवापार में करीब 60 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने के बाद आखिरकार विद्युत सेवा बहाल हो गई है। लगातार बारिश के बीच अंधेरे में रहने को मजबूर ग्रामीणों ने बिजली आने पर राहत की सांस ली है। इससे पहले ग्रामीणों ने विभागीय लापरवाही को लेकर नाराजगी जताई थी और बिजली व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किए थे।
सोहागपुर फीडर अंतर्गत आने वाले रींवापार गांव में बिजली गुल होने के बाद ग्रामीणों ने कई बार संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया। ग्रामीणों का आरोप था कि विभाग की ओर से न तो फाल्ट की स्पष्ट जानकारी दी जा रही थी और न ही बिजली बहाली का निश्चित समय बताया जा रहा था।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि गर्मी के मौसम में विद्युत लाइनों के नीचे पेड़ों की समय पर कटाई-छंटाई नहीं किए जाने के कारण बरसात में बार-बार फाल्ट की स्थिति बन रही है। कई स्थानों पर अब भी पेड़ों की शाखाएं विद्युत तारों के संपर्क में हैं, जिससे भविष्य में भी ऐसी समस्या उत्पन्न होने की आशंका बनी हुई है।
बिजली सुधार कार्य के दौरान क्षेत्रीय ठेकेदार अंतराम यादव ने बताया कि उन्होंने विद्युत आपूर्ति बाधित होने की जानकारी अगले ही दिन विभागीय अधिकारियों को दे दी थी, लेकिन लगातार बारिश के कारण सुधार कार्य प्रभावित हुआ। उन्होंने विद्युत विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व में किए गए मेंटेनेंस और अन्य कार्यों के भुगतान लंबे समय से लंबित हैं।
अंतराम यादव के अनुसार वर्ष 2023 में क्षेत्र में पुराने पतले कंडक्टर तारों को बदलकर मोटे रैबिट कंडक्टर लगाने तथा आवश्यक स्थानों पर अतिरिक्त विद्युत पोल स्थापित करने का कार्य स्वीकृत हुआ था, लेकिन तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी यह कार्य कई स्थानों पर पूरा नहीं हो सका है। उनका कहना है कि यदि किसी ठेकेदार द्वारा कार्य नहीं किया जा रहा है तो विभाग को वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।
ग्रामीणों का भी कहना है कि वर्तमान में कई जगहों पर पुराने पतले तारों को जोड़कर अस्थायी मरम्मत की गई है, जिससे भविष्य में फिर से बिजली बाधित होने की संभावना बनी रहेगी। उन्होंने क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था को स्थायी रूप से मजबूत करने की मांग की है।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब शासन द्वारा विद्युत व्यवस्था के रखरखाव और सुधार के लिए राशि उपलब्ध कराई जाती है, तब ठेकेदारों के पुराने कार्यों के भुगतान वर्षों तक लंबित क्यों रखे जाते हैं? यदि वास्तव में करीब दो वर्ष पुराने बिलों का भुगतान लंबित है तो इसका सीधा असर मरम्मत और मेंटेनेंस कार्यों पर पड़ना स्वाभाविक है। ऐसे में विभाग को इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए ताकि भविष्य में ग्रामीणों को लंबे समय तक अंधेरे में रहने की नौबत न आए।






