छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बीच बिहार और दिल्ली पुलिस की ओर से अलग-अलग जवाब सामने आए हैं।
बिहार सरकार ने कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा कि सीवान में प्रदर्शन के दौरान एक पुलिसकर्मी ने AK-47 से चार राउंड फायर किए थे। सरकार के मुताबिक फायरिंग हवा में की गई थी और AK-47 की गोली से किसी प्रदर्शनकारी के घायल होने की बात सामने नहीं आई है। पूरे मामले में बैलिस्टिक जांच जारी है।
सरकार ने यह भी बताया कि छात्र आंदोलन के दौरान राज्य में 69 FIR दर्ज की गईं और करीब 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया। बिहार सरकार ने पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के आरोपों से इनकार किया है।
वहीं दिल्ली में प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि करीब 30 हजार लोग जुटे थे और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लगभग 5 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। पुलिस ने ‘कील वाली लाठी’ के इस्तेमाल के आरोपों को भी खारिज किया है। साथ ही पुलिस के मुताबिक संसद मार्च की अनुमति नहीं दी गई थी।
अब सुप्रीम कोर्ट में अहम सवाल यही है कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के दौरान पुलिस की कार्रवाई तय कानूनी मानकों के अनुरूप थी या नहीं। बिहार में AK-47 फायरिंग और दिल्ली में पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों पर कोर्ट के रुख पर सभी की नजरें टिकी हैं।






