बरेली। कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित ‘दरबारे खास’ रेस्टोरेंट को लेकर नॉनवेज परोसे जाने के आरोपों के बाद विवाद खड़ा हो गया है। मामले में सामने आए एक वीडियो को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि वीडियो 15 अगस्त, शनिवार शाम करीब 5 बजे का है। इसी समय कांवड़ यात्रा मार्ग से कांवड़ियों की आवाजाही भी हो रही थी। दूसरी ओर, रेस्टोरेंट की ओर से कथित तौर पर “हम सिर्फ शाकाहारी भोजन दे रहे हैं” का बोर्ड लगाए जाने की बात सामने आई है।
- वीडियो सामने आने के बाद बढ़ा विवाद
मामले में सामने आए वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि रेस्टोरेंट के अंदर नॉनवेज भोजन परोसा जा रहा था। हालांकि, वीडियो की वास्तविक तारीख, समय और स्थान की स्वतंत्र पुष्टि किया जाना अभी बाकी है। यही वजह है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।
- खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच पर सवाल
बताया जा रहा है कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी देवेंद्र कुमार ने रेस्टोरेंट का निरीक्षण किया था। जांच के बाद रेस्टोरेंट को नॉनवेज नहीं परोसे जाने के आधार पर क्लीन चिट दिए जाने की बात कही जा रही है। अब वीडियो सामने आने के बाद इस जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
- 15 अगस्त के CCTV को लेकर बड़ा सवाल
मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि क्या खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने 15 अगस्त की शाम करीब 5 बजे का CCTV फुटेज देखा था? यदि जांच के समय उस अवधि की रिकॉर्डिंग उपलब्ध थी तो क्या उसे जांच का हिस्सा बनाया गया? यदि CCTV फुटेज नहीं देखा गया, तो क्लीन चिट किस आधार पर दी गई—यह भी स्पष्ट किए जाने की मांग हो रही है।
- रेस्टोरेंट से रिकॉर्डिंग मांगी गई या नहीं?
मामले की जानकारी सामने आने के बाद अधिकारी द्वारा पत्रकार से ही CCTV फुटेज मांगने की बात भी कही जा रही है। इससे एक और सवाल उठ रहा है कि क्या विभाग ने स्वयं रेस्टोरेंट प्रबंधन से संबंधित समय की CCTV रिकॉर्डिंग मांगी थी? यदि रिकॉर्डिंग मांगी गई थी तो उसकी जांच के क्या निष्कर्ष रहे, इसे भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
- शाकाहारी भोजन वाले बोर्ड की भी जांच जरूरी
रेस्टोरेंट की ओर से कथित तौर पर “हम सिर्फ शाकाहारी भोजन दे रहे हैं” का बोर्ड लगाए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह भी होना चाहिए कि बोर्ड कब लगाया गया था और संबंधित अवधि में रेस्टोरेंट में वास्तव में किस प्रकार का भोजन तैयार अथवा परोसा जा रहा था।
- जांच रिपोर्ट पर उठ रहे सवाल
वीडियो के सामने आने के बाद पहले दिए गए जांच निष्कर्ष पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि वीडियो की सत्यता और उसमें दिखाई दे रही गतिविधियों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वीडियो की फोरेंसिक/तकनीकी जांच, CCTV फुटेज और मौके से संबंधित अन्य साक्ष्यों का परीक्षण आवश्यक माना जा रहा है।
- प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
पूरे मामले में प्रशासन से मांग की जा रही है कि 15 अगस्त शाम के CCTV फुटेज, सामने आए वीडियो और खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट का आपस में मिलान कराया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि निरीक्षण के दौरान किन दस्तावेजों, रिकॉर्डिंग और तथ्यों की जांच की गई थी।
- उठ रहे प्रमुख सवाल
- 15 अगस्त शाम करीब 5 बजे का CCTV फुटेज जांचा गया या नहीं?
- क्या रेस्टोरेंट प्रबंधन से संबंधित समय की रिकॉर्डिंग मांगी गई?
- “सिर्फ शाकाहारी भोजन” वाले बोर्ड की जांच हुई या नहीं?
- क्लीन चिट देने से पहले किन तथ्यों और साक्ष्यों की जांच की गई?
- सामने आए वीडियो की तारीख, समय और स्थान की पुष्टि कब और कैसे होगी?
- वीडियो सही पाए जाने की स्थिति में पहले दिए गए जांच निष्कर्ष की समीक्षा होगी या नहीं?
फिलहाल पूरे मामले में किसी भी पक्ष पर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले वीडियो, CCTV और विभागीय रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच जरूरी है। प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि 15 अगस्त की शाम रेस्टोरेंट में वास्तव में क्या परोसा जा रहा था और खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच किन तथ्यों के आधार पर हुई थी।





