Mon. Apr 19th, 2021

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वैध पट्टे की आड़ में हो रहा ह अवैध रेत खनन ।नियमो की उड़ाई जा रही ह धज्जिया।प्रसाशन बना मौन…

अपने आप को सपा नेता बताने वाले भाजपा सरकार में बन बैठे खनन माफिया।

मवी में अवैध खनन धड़ल्ले से जारी है। रातभर प्रतिबंधित पॉर्कलेन व जीसीबी मशीनें गरज रही हैं,प्रशासन बना हुआ है अनजान

कैराना। क्षेत्र के गांव मवी में वैध पट्टे की आड़ में अवैध खनन को लेकर ग्रामीणों को बाढ़ का डर सताने लगा है।

क्षेत्र के गांव मवी में तीन माह के लिए सफाई के नाम पर आवंटित खनन पट्टे पर खनन ठेकेदार द्वारा धड़ल्ले से अवैध तरीके से पॉर्कलेन मशीन का प्रयोग करते हुए यमुना नदी के सीने को छलनी किया जा रहा है। खनन ठेकेदार अपनी दबंगता के बल पर नियम कायदों को ताक पर रखकर खनन करा रहा है, जबकि तीन माह के लिए आवंटित इस पट्टे पर पॉर्कलेन या जेसीबी मशीन पूरी तरह से प्रतिबंधित है, लेकिन इसके बावजूद भी खनन ठेकेदार धड़ल्ले से अवैध खनन कर रहा है। उपरोक्त खनन स्थल पर सफाई के नाम पर तीन फुट रेत उठाने की परमिशन है,जबकि मौके पर खनन ठेकेदार ने अपनी दबंगता के बल पर 8 से 10 फुट गहरे कुण्ड बना दिये हैं, जो ग्रामीणों के लिए मौत का सबब बनते हैं, इन्ही गहरे कुंडों में अबतक दर्जनों ग्रामीण मौत के मुंह में समा चुके हैं। उधर यमुना नदी में ठेकेदार द्वारा गहरे कुण्ड बनाये जाने आसपास के छोटे किसानों को अपनी काश्त की भूमि यमुना नदी में समाए जाने का भय सताने लगा है। गहरे कुंड होने के कारण यमुना नदी का बहाव छोटे किसानों की भूमि की ओर होगा तो उनकी भूमि यमुना नदी में समा जानी तय माना जा रहा है,जिससे छोटे किसानों के सामने रोज़ी रोटी का संकट गहरा जाएगा। अब देखना यह है कि स्थानीय प्रशासन इस अवैध धंधे पर कबतक अंकुश लगा पता है।

क्षेत्र के गांव मवी में इन दिनों नियमों का उल्लंघन कर धड़ल्ले से यमुना नदी का सीना छलनी किया जा रहा। सफाई के नाम पर आवंटित पट्टे पर धड़ल्ले से पॉर्कलेन मशीन व जेसीबी चलाई जा रही है। खनन माफिया बेखौफ होकर धड़ल्ले से अवैध खनन कर रहे हैं। खुलेआम सफाई के नाम पर आवंटित पट्टों पर प्रतिबंधित पॉर्कलेन मशीन गरज रही है,लेकिन बावजूद इसके प्रशासन कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है। क्या दो या तीन माह के लिए सफाई के नाम पर छोड़े पट्टों पर पॉर्कलेन या जेसीबी मशीन वैध है। नही है तो फिर कार्यवाही क्यों नहीँ ? किसके इशारे पर गरज रही है पॉर्कलेन मशीनें? कौन है ज़िम्मेदार? आखिर खनन माफियाओं पर नकेल कब कसी जाएगी।

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