अशोक कुमार श्रीवास की रिपोर्ट
कोरबा। रेलवे मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान कोरबा लोकसभा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए क्षेत्र की उपेक्षा का सवाल सामने रखा गया। चर्चा में कहा गया कि रेलवे को देश की जीवन रेखा कहा जाता है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में यह आम यात्रियों की बजाय राजस्व कमाने का माध्यम बनता जा रहा है। विशेषकर छत्तीसगढ़ और कोरबा क्षेत्र के लोगों को पर्याप्त यात्री सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
बताया गया कि कोरबा क्षेत्र दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे को उसके कुल राजस्व का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा देता है। देश के बड़े हिस्से को कोरबा के कोयले से ऊर्जा मिलती है, लेकिन इसके बावजूद यहां यात्री ट्रेनों की कमी बनी हुई है और अधिकतर ट्रैक पर मालगाड़ियों को प्राथमिकता दी जाती है। कई बार यात्री ट्रेनों को घंटों तक रोककर मालगाड़ियों को रास्ता दिया जाता है।
चर्चा के दौरान गेवरा रोड–पेण्ड्रा रोड रेल कॉरिडोर परियोजना में हो रही देरी का मुद्दा भी उठाया गया। इस परियोजना का भूमि पूजन वर्ष 2018 में किया गया था, लेकिन वर्ष 2026 तक भी इसका काम पूरा नहीं हो सका है। बजट में इस परियोजना को पूरा करने के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करने की मांग की गई।
कोरबा में बनकर तैयार पिट लाइन को अब तक शुरू नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए गए। कहा गया कि जब तक पिट लाइन पूरी तरह सक्रिय नहीं होगी, तब तक नई ट्रेनों की शुरुआत संभव नहीं हो पाएगी।
इसके अलावा कई महत्वपूर्ण ट्रेनों को कोरबा तक विस्तारित करने की मांग भी रखी गई। बताया गया कि नर्मदा एक्सप्रेस (18233–18234), अमृतसर–छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस और तिरुपति–बिलासपुर जैसी ट्रेनें बिलासपुर या इतवारी (नागपुर) तक ही सीमित हैं, जिन्हें कोरबा तक बढ़ाया जा सकता है ताकि औद्योगिक श्रमिकों, छात्रों और यात्रियों को सुविधा मिल सके।
चाम्पा और सक्ती स्टेशनों पर गीतांजलि एक्सप्रेस और अहमदाबाद एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों के ठहराव की मांग भी रखी गई। वहीं कोरबा से कटनी मार्ग पर एक भी सीधी यात्री ट्रेन नहीं होने और कोरबा–राउरकेला रेल ट्रैक बनने के पांच साल बाद भी वहां केवल मालगाड़ियों के संचालन का मुद्दा भी उठाया गया।
चर्चा में सरकार से रेलवे योजनाओं में क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने और कोरबा सहित छत्तीसगढ़ के यात्रियों को बेहतर रेल सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई।
रेलवे बजट पर कोरबा की अनदेखी का मुद्दा उठा, यात्री ट्रेनों और परियोजनाओं में देरी पर सवाल






