वंचित समाज इंसाफ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जनाब डॉ. शेख साहब ने केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार जानबूझकर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित नहीं करना चाहती, क्योंकि ऐसा करने पर उनका एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा खत्म हो जाएगा।
डॉ. शेख ने कहा कि आज वे इस मुद्दे पर खुलकर बोल रहे हैं और अगर किसी को बुरा लगे तो वह अपने दिल पर हाथ रखकर धर्म से ऊपर उठकर सोचे कि इसमें बुरा क्या है। उन्होंने सवाल उठाया कि—
“गाय काटने का लाइसेंस कौन देता है?”
“गाय का मीट एक्सपोर्ट करने का लाइसेंस कौन जारी करता है?”
“भारत दुनिया में मीट एक्सपोर्ट करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश कैसे बना?”
“मीट कंपनियों से चंदा किसने खाया?”
उन्होंने कहा कि जब गरीब मुसलमान सड़क किनारे बिरयानी बेचते हैं, चाहे वह चिकन की हो या भैंस की, तभी तथाकथित गौ-रक्षक सक्रिय हो जाते हैं। लेकिन जब मीट फैक्ट्रियों से करोड़ों का धंधा होता है तब किसी का खून नहीं खौलता।
डॉ. शेख ने सवाल किया कि अगर गाय वाकई पूजनीय है तो फिर वह सड़कों पर भूखी-प्यासी क्यों घूम रही है और गौशालाओं में क्यों मर रही है, जबकि सरकार ने उनके लिए हजारों एकड़ जमीन दान कर दी है।
उन्होंने याद दिलाया कि उनकी पार्टी ने 2009 में जंतर-मंतर पर 7 दिन का धरना देकर कांग्रेस सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की थी, लेकिन तब भी किसी सरकार ने इस दिशा में कदम नहीं उठाया।
अंत में डॉ. शेख ने मुस्लिम समाज से अपील करते हुए कहा कि जो लोग गाय के मीट का व्यापार कर रहे हैं, वे इस काम को छोड़ दें और इसके बजाय गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कराने की मुहिम में शामिल हों, ताकि हिंदू-मुस्लिम भाईचारा मजबूत हो सके और असली दोषियों का चेहरा सामने आ सके।






