सहारनपुर: सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक द्वारा अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त किए जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस फैसले पर तीखी टिप्पणी करते हुए कई सवाल उठाए और सरकार के साथ हुई बातचीत को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
इमरान मसूद ने कहा कि सोनम वांगचुक का यह कदम उन्हें सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की याद दिलाता है। उनका दावा था कि जिस तरह अन्ना हजारे लंबे समय तक सार्वजनिक मुद्दों पर शांत रहे, उसी तरह अब वांगचुक भी सक्रिय नहीं दिखाई देंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अनशन समाप्त करने से पहले सरकार के साथ हुई बातचीत में छात्र प्रतिनिधियों की मौजूदगी नहीं थी।
कांग्रेस सांसद ने सवाल किया कि यदि आंदोलन छात्रों और नीट पेपर लीक जैसे मुद्दे से जुड़ा था, तो बातचीत के दौरान छात्रों को शामिल क्यों नहीं किया गया। उनके मुताबिक, बैठक में मुख्य रूप से लद्दाख के प्रतिनिधि मौजूद थे। मसूद ने सरकार और सोनम वांगचुक के बीच किसी तरह की “समझ” या “डील” होने का आरोप भी लगाया, हालांकि इस संबंध में उन्होंने कोई ठोस प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया।
नीट पेपर लीक मामले को लेकर कांग्रेस पहले से ही केंद्र सरकार पर हमलावर रही है। पार्टी का कहना है कि इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक लगातार उठाया गया है और छात्रों के हितों से जुड़े सवालों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद खत्म हुआ अनशन
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे। जंतर-मंतर से हटाए जाने के बाद भी उन्होंने अपना अनशन जारी रखा था। उनकी तबीयत लगातार बिगड़ने पर उन्हें पहले अस्पताल ले जाया गया और बाद में अदालत के निर्देश पर गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया।
गुरुवार शाम केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने अस्पताल में सोनम वांगचुक से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने उनसे स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए अनशन समाप्त करने का आग्रह किया। बातचीत के बाद वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल खत्म करने का फैसला लिया।
अनशन समाप्त होने के बाद अब इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर विपक्ष सरकार और बातचीत की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार की ओर से इसे संवाद के जरिए निकला सकारात्मक समाधान बताया जा रहा है।






