संयुक्त राष्ट्र महासभा में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू के भाषण के दौरान उस वक्त माहौल गरमा गया, जब बड़ी संख्या में देशों के प्रतिनिधि सभा से बाहर निकल गए। नेतनयाहू के मंच पर पहुंचते ही हूटिंग और विरोध की आवाजें सुनाई दीं, जबकि इजरायली प्रतिनिधिमंडल ने उनके समर्थन में नारे लगाए और तालियां बजाईं। महासभा के अध्यक्ष को कई बार सदन में व्यवस्था बनाए रखने की अपील करनी पड़ी।
रिपोर्टों के मुताबिक, दर्जनों प्रतिनिधियों ने नेतनयाहू के भाषण से पहले या उसके दौरान वॉकआउट किया। फिलिस्तीनी मिशन ने पहले ही कई देशों से सामूहिक रूप से सदन से बाहर निकलने की अपील की थी। हालांकि, 75 देशों के आधिकारिक तौर पर बहिष्कार करने की संख्या की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं होती।
विरोध के बीच नेतनयाहू ने अपने भाषण में इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों का बचाव किया और गाजा में नरसंहार के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने ईरान को लेकर भी इजरायल की कार्रवाई का बचाव किया। नेतनयाहू ने वॉकआउट करने वाले प्रतिनिधियों पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि जो लोग अभी भी बाहर नहीं गए हैं, वे भी ऐसा कर सकते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में इजरायल को लेकर जारी अंतरराष्ट्रीय मतभेदों को एक बार फिर सामने ला दिया है। जहां कई देश इजरायल की गाजा नीति की आलोचना कर रहे हैं, वहीं इजरायल इन आरोपों को खारिज करते हुए अपनी सुरक्षा और आत्मरक्षा के अधिकार पर जोर देता है।





