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23 दिन भूखी रही रिसर्च स्कॉलर! अब पूरे देश में गूंज रहा नेहा बोरा का नाम……

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर पेपर लीक, परीक्षा अनियमितताओं, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच एक नाम राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक चर्चा में रहा—नेहा बोरा। 23 दिनों तक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर रहने वाली नेहा ने अपने स्वास्थ्य की गंभीर स्थिति के बावजूद आंदोलन जारी रखा और छात्रों की आवाज़ बुलंद की।

डॉक्टरों के अनुसार लंबे उपवास के कारण उनका वजन करीब साढ़े सात किलोग्राम कम हो गया था और रक्त शर्करा का स्तर भी चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया था। इसके बावजूद उन्होंने जंतर-मंतर के मंच से कहा, “हमारी चोटें हिंसा की गवाही देंगी।”

शिक्षा से छात्र राजनीति तक का सफर

उत्तराखंड मूल की नेहा बोरा का बचपन सिलीगुड़ी में बीता, जहां उन्होंने दिल्ली पब्लिक स्कूल से स्कूली शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में स्नातक और आंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली से स्नातकोत्तर की पढ़ाई की। वर्तमान में वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स में पीएचडी की शोधार्थी हैं।

रंगमंच और सामाजिक विषयों से जुड़ाव ने उनके व्यक्तित्व और सार्वजनिक संवाद को नई दिशा दी। छात्र राजनीति में सक्रिय होने के बाद वह ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़ीं और बाद में संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं।

शिक्षा और समान अवसर की आवाज

नेहा बोरा लगातार शिक्षा के निजीकरण, फीस वृद्धि, छात्रवृत्ति, छात्रावास, महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर सक्रिय रही हैं। उन्होंने कई सामाजिक और मानवाधिकार से जुड़े विषयों पर भी अपनी राय सार्वजनिक रूप से रखी है।

जंतर-मंतर आंदोलन का चेहरा

पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुए आंदोलन में नेहा बोरा ने अपने साथियों के साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। आंदोलन के दौरान सोनम वांगचुक सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी समर्थन दिया।

नेहा ने आरोप लगाया कि संसद मार्च के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया। उनका कहना था कि आंदोलन कर रहे युवाओं की मांगों पर संवाद के बजाय कार्रवाई की गई।
जवाबदेही की मांग
नेहा बोरा का कहना है कि लाखों छात्र वर्षों की मेहनत के बाद भी पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं का सामना कर रहे हैं। उनका कहना है कि छात्र सहानुभूति नहीं, बल्कि निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और जवाबदेही चाहते हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल से बातचीत के दौरान भी उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
नेहा बोरा का कहना है कि यह किसी एक व्यक्ति का आंदोलन नहीं, बल्कि उन लाखों विद्यार्थियों की आवाज है जो पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली चाहते हैं। उनकी प्रमुख मांगों में पेपर लीक पर रोक, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, सस्ती और सुलभ शिक्षा तथा छात्रों से संवाद शामिल है।

23 दिनों की भूख हड़ताल के बाद नेहा बोरा राष्ट्रीय स्तर पर छात्र आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरी हैं। अब यह देखना होगा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े इन मुद्दों पर सरकार और संबंधित संस्थाएं क्या कदम उठाती हैं।

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