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किसानों को यूरिया और अन्य उर्वरकों के लिए खाद वितरण केंद्रों के चक्कर काटने लंबी लाइनों से राहत….

झालावाड़ से ब्यूरो चीफ आसिफ शेरवानी की रिपोर्ट

किसानों को यूरिया और अन्य उर्वरकों के लिए खाद वितरण केंद्रों के चक्कर काटने और लंबी लाइनों से राहत मिलने जा रही है। कृषि विभाग अब ‘एफएफएस’ (फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल) मोबाइल ऐप के जरिए ऑनलाइन खाद बुकिंग की पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत किसान घर बैठे मोबाइल से ऐप पर अपनी पसंद की नजदीकी दुकान चुनकर खाद प्राप्त कर सकेंगे। खाद वितरण की नई ऑनलाइन व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु कृषि विभाग द्वारा प्रत्येक ब्लॉक के उर्वरक विक्रेताओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब तक खानपुर, अकलेरा, मनोहरथाना, असनावर एवं झालरापाटन क्षेत्र के 400 से अधिक उर्वरक विक्रेताओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है।
डॉ. नरेश कुमार शर्मा, संयुक्त निदेशक कृषि (वि.), झालावाड़ ने बताया कि इस व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि किसानों की जमीन और फसल के रिकॉर्ड (फार्म आईडी) के आधार पर ऐप स्वयं बताएगा कि उन्हें कौन-सा खाद व किस मात्रा में लेना चाहिए। इससे अनावश्यक खरीद पर रोक लगेगी और खाद की कालाबाजारी भी कम होगी। डिजिटल स्टॉक दर्ज रहने से कृषि विभाग को खाद की उपलब्धता का सटीक आकलन करने में मदद मिलेगी। भविष्य में विभाग खाद की होम डिलीवरी मॉडल पर भी कार्य कर रहा है। विभाग का लक्ष्य 15 अगस्त के बाद इस व्यवस्था को पूरे प्रदेश में लागू करना है. जिसके लिए तकनीकी प्रक्रिया जारी है।
जिले में वर्तमान में 710 झालावाड़ में 614 दुकानें ऑनलाइन जुड़ीं, ई-टोकन से मिलेगा खाद खाद-बीज दुकानों को ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ चुकी हैं। ऐप पर दुकानों की वास्तविक उपलब्धता स्टॉक और खाद के प्रकार की जानकारी लाइव दिखाई देगी। सहकारी समितियां भी पंजीकृत हैं, जिनमें

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भी खाद उपलब्ध होगा। जिन किसानों को मोबाइल चलाने में समस्या है, उन्हें मित्र की सहायता से भी बुकिंग कर सकेंगे।

लाइन से मुक्ति मिलेगी नई व्यवस्था से खाद की बुकिंग, स्टॉक और वितरण का पूरा रिकॉर्ड एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रहेगा। हमारा उद्देश्य तकनीक के जरिए पारदर्शिता लाना है ताकि किसानों को घंटों लाइन में न लगना पड़े।

“एफएफएस” (फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल) से होगा यह लाभ नई व्यवस्था का प्रमुख लाभ यह है कि किसानों को उनकी फसल एवं भूमि के प्रकार के आधार पर वैज्ञानिक सिफारिश के अनुरूप उर्वरक उपलब्ध करवाने में सहायता मिलेगी। इससे उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा मिलेगा तथा किसानों द्वारा अंधाधुंध उर्वरक उपयोग पर भी प्रभावी रोक लग सकेगी।

किसान फार्मर आईडी होगी आवश्यक जिले में 2,18,000 किसानों की फार्म आईडी बन चुकी है। शेष रहे किसान अपनी फार्मर आईडी शीघ्र बनवाएं, अन्यथा भविष्य में खाद बुकिंग, सरकारी योजनाओं का लाभ एवं कृषि संबंधी सेवाएं प्राप्त करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

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