असम के कार्बी आंगलोंग ज़िले में थाडौ जनजाति के एक सम्मानित नेता नेहकाम जोमहाओ की हत्या से पूरा इलाका सन्न है। पुलिस के मुताबिक, शनिवार रात उन पर धारदार हथियारों से हमला किया गया और फिर उनका शव जमुना नदी में फेंक दिया गया। रविवार से लगातार तलाशी अभियान चल रहा है, लेकिन अब तक शव बरामद नहीं हो सका है। इस घटना के बाद से स्थानीय समुदाय में गहरा आक्रोश और भय का माहौल है। पुलिस ने पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया है और अन्य से पूछताछ जारी है, वहीं फोरेंसिक और सीआईडी टीमें भी जांच में जुटी हैं।
बताया जा रहा है कि जोमहाओ हाल ही में मणिपुर में मैतेई समुदाय के साथ शांति वार्ता का हिस्सा बने थे। दावा किया जा रहा है कि इसी पहल के चलते उन्हें निशाना बनाया गया। हालांकि पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है। मणिपुर लंबे समय से जातीय हिंसा की मार झेल रहा है, और जोमहाओ की कोशिशें दोनों समुदायों के बीच संवाद और विश्वास बहाल करने की दिशा में अहम मानी जा रही थीं। उनकी हत्या ने न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे समुदाय को झकझोर दिया है, और लोगों के मन में एक ही सवाल है—क्या शांति की पहल ही उनकी जान ले गई?






