आयुष्मान भारत के क्लेम निपटारे में आएगी तेजी, सरकार ने लॉन्च किए कई डिजिटल हेल्थ टूल्स
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने डिजिटल हेल्थ सिस्टम को और मजबूत करने के लिए कई नई पहलों और डिजिटल टूल्स की शुरुआत की है। इनका उद्देश्य स्वास्थ्य संबंधी डेटा के सुरक्षित उपयोग, इंश्योरेंस क्लेम के तेज निपटारे और अस्पतालों व स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के बीच डिजिटल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है।
नई दिल्ली में आयोजित ‘आरोग्य मंथन 2026’ कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा ने इन पहलों को लॉन्च किया। यह कार्यक्रम आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) के आठ वर्ष और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के पांच वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) की ओर से शुरू की गई प्रमुख पहलों में नेशनल हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स रजिस्ट्री (NHPR) मोबाइल ऐप, नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज (NHCX) इंप्लीमेंटेशन गाइड, मॉडल डिजिटल हेल्थ सेंटर के लिए गाइडबुक, सिक्योर डेटा एनवायरनमेंट (SDE) एप्लिकेशन और AB PM-JAY के तहत बीमा दावों के ऑटोमेटेड सेटलमेंट के लिए फ्रेमवर्क शामिल हैं।
स्वास्थ्य डेटा के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए SDE
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु के सहयोग से सिक्योर डेटा एनवायरनमेंट तैयार किया है। इसका उद्देश्य आयुष्मान भारत और डिजिटल हेल्थ मिशन के माध्यम से उपलब्ध स्वास्थ्य डेटा तक नियंत्रित पहुंच उपलब्ध कराना और उसका सुरक्षित तरीके से विश्लेषण करना है।
सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थाएं इस डेटा का विश्लेषण NHA के एक अलग और सुरक्षित सिस्टम में कर सकेंगी। डेटा से तैयार किए गए निष्कर्षों को सार्वजनिक करने से पहले उनकी जांच की जाएगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य व्यक्तिगत स्वास्थ्य संबंधी जानकारी की सुरक्षा बनाए रखते हुए रिसर्च, सरकारी योजनाओं की योजना बनाने, परिणामों के विश्लेषण और जिम्मेदार तरीके से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
आयुष्मान भारत के क्लेम का ऑटोमेटेड सेटलमेंट
कार्यक्रम में AB PM-JAY के तहत बीमा दावों के अपने आप निपटारे के लिए एक विशेष फ्रेमवर्क भी लॉन्च किया गया। यह तकनीक, डेटा और एनालिटिक्स की मदद से क्लेम की प्रक्रिया को सरल बनाने और उसके निपटारे में तेजी लाने पर केंद्रित है।
इस व्यवस्था के जरिए क्लेम प्रोसेसिंग में मानवीय हस्तक्षेप पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया जाएगा। इससे क्लेम प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने और उसके निपटारे को तेज करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
NHCX से अस्पतालों और बीमा कंपनियों के बीच डिजिटल कनेक्टिविटी
बीमा कंपनियों के लिए जारी की गई NHCX इंप्लीमेंटेशन गाइड का उद्देश्य अस्पतालों और बीमा कंपनियों के बीच डिजिटल क्लेम प्रक्रिया को बेहतर बनाना है।
नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज (NHCX) को अस्पतालों और बीमा कंपनियों को जोड़ने वाले साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म के तौर पर विकसित किया जा रहा है। इसके जरिए हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़े लेन-देन और क्लेम प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।
डिजिटल हेल्थ नेटवर्क से जुड़ेंगे अधिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता
NHPR मोबाइल ऐप और मॉडल डिजिटल हेल्थ सेंटर की गाइडबुक भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। इनका उद्देश्य डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना और अधिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के नेटवर्क से जोड़ना है।
जे.पी. नड्डा ने डिजिटल हेल्थ की भूमिका पर दिया जोर
कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि आयुष्मान भारत और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की अब तक की यात्रा स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीक की बढ़ती भूमिका को दिखाती है। उन्होंने डिजिटल सिस्टम के जरिए मरीजों की पहचान, मंजूरी की प्रक्रिया और इलाज तक पहुंच को आसान बनाने की बात कही।
नड्डा ने कहा कि नई पहल डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ स्वास्थ्य डेटा के सुरक्षित इस्तेमाल को बढ़ावा देंगी। इससे हेल्थ रिसर्च, इनोवेशन और डेटा आधारित निर्णय लेने के लिए नए रास्ते खुलेंगे।
आयुष्मान भारत और ABDM की उपलब्धियां
सरकार के अनुसार, आयुष्मान भारत योजना के तहत अब तक 60 करोड़ से अधिक लाभार्थी शामिल हो चुके हैं। योजना के तहत 13 करोड़ से अधिक अस्पताल में भर्ती मामलों में 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का मुफ्त इलाज किया जा चुका है।
वहीं, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत अब तक 97.8 करोड़ से अधिक ABHA अकाउंट बनाए जा चुके हैं। इससे 121 करोड़ से अधिक हेल्थ रिकॉर्ड जोड़े गए हैं।
इसके अलावा, डिजिटल हेल्थ सिस्टम में 5.6 लाख से अधिक स्वास्थ्य केंद्र और करीब 11 लाख स्वास्थ्य पेशेवर रजिस्टर्ड हैं।
मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर
नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) एम. श्रीनिवास ने स्वास्थ्य सेवाओं के अगले चरण में मरीजों की निरंतर देखभाल, इलाज की गुणवत्ता और मरीज-केंद्रित सेवाओं को प्राथमिकता देने की बात कही।
उन्होंने विशेष इलाज की आवश्यकता वाले मरीजों को बेहतर रेफरल सिस्टम के माध्यम से बड़े अस्पतालों तक पहुंचाने की जरूरत पर भी जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने ABHA ID के व्यापक इस्तेमाल, हेल्थ रिकॉर्ड के बीच बेहतर तालमेल और नागरिकों की सहमति तथा डेटा सुरक्षा से जुड़े उपायों को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
हेल्थ इंश्योरेंस में मानकीकरण की जरूरत
आईआरडीएआई के अध्यक्ष अजय सेठ ने स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र में मानकीकरण और पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने हेल्थ इंश्योरेंस आईडी के तौर पर ABHA को व्यापक रूप से अपनाने की बात कही।
उन्होंने इलाज के लिए कोड तय करने, बिलिंग के फॉर्मेट को एक समान बनाने और उपचार से जुड़े नियमों को मानकीकृत करने पर भी जोर दिया।
ICMR ने स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट वर्कफ्लो पर दी जानकारी
कार्यक्रम में आईसीएमआर के महानिदेशक और स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव राजीव बहल ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने में मानकीकृत उपचार प्रक्रियाओं और लागत-प्रभावशीलता के मूल्यांकन की भूमिका पर बात की।
उन्होंने कहा कि तय प्रक्रियाओं और एल्गोरिदम के आधार पर उपचार से मरीजों को बेहतर और एक समान स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
बहल के अनुसार, ICMR ने 150 से अधिक स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट वर्कफ्लो और गाइडलाइंस तैयार की हैं। उन्होंने यह भी बताया कि स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के तहत भारत में हेल्थ टेक्नोलॉजी असेसमेंट के जरिए स्वास्थ्य तकनीकों और उपचारों की लागत तथा उनके प्रभाव का मूल्यांकन किया जाता है।






