लोकेशन – समस्तीपुर रिपोर्ट –
नवनीत कुमार झा
समस्तीपुर/विभूतिपुर। प्रखंड क्षेत्र के सिंघिया बुजुर्ग उत्तर पंचायत स्थित वार्ड संख्या-09 के मनरेगा भवन परिसर में संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती के अवसर पर सहयोग शिविर का आयोजन किया गया। शिविर की शुरुआत संत रविदास जी के तैलचित्र पर पंचायत सचिव हरिहर प्रसाद यादव एवं बीस सूत्री सदस्य मनोज कुमार द्वारा माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इसके बाद उपस्थित लोगों ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए।इस दौरान विकास मित्र राजकुमारी, रोजगार सेवक रामबाबू यादव, स्वच्छता पर्यवेक्षक चंदन कुमार, लेडीज सुपरवाइजर प्रीति कुमारी, यामुन राम सहित सैकड़ों लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित की।
शिविर में रोजगार सेवक रामबाबू यादव ने कहा कि गरीब एवं मजदूर परिवारों की ओर से काम की मांग किए जाने पर उन्हें मनरेगा के तहत 125 दिनों तक काम उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता है। वहीं, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी की अनुपस्थिति में दूसरे क्षेत्र की सुपरवाइजर प्रीति कुमारी ने बाल विकास विभाग से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी।हालांकि, शिविर की व्यवस्था और अधिकारियों की उपस्थिति को लेकर कई सवाल खड़े हुए। जानकारी के अनुसार, शिविर में न तो शिविर अध्यक्ष उपस्थित हुए और न ही शिविर प्रभारी ने भाग लिया। ऐसे में अध्यक्ष और प्रभारी की अनुपस्थिति में ही शिविर की औपचारिकता पूरी कर ली गई। शिविर में पंचायत के मुखिया अरुण कुमार महतो, पंचायत सचिव हरिहर प्रसाद यादव, आवास सहायक नागेंद्र कुमार, सेविका रूबी कुमारी एवं मधु देवी सहित अन्य कर्मी मौजूद रहे।राशन कार्ड के एक दर्जन आवेदन लंबित, आवेदकों को नहीं मिला जवाबशिविर की सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि पूर्व में आपूर्ति विभाग से संबंधित करीब एक दर्जन आवेदन दिए जाने के बावजूद एक भी आवेदन का निष्पादन नहीं किया गया। इतना ही नहीं, आवेदकों को उनके आवेदन की वर्तमान स्थिति बताने वाला भी कोई जिम्मेदार अधिकारी या कर्मी मौजूद नहीं था।लंबित आवेदनों में प्रीति कुमारी, गीता देवी, लक्ष्मी कुमारी, उमेश पासवान, पूजा देवी, रूबी देवी, रीता देवी, रानी देवी, सरोज कुमार पासवान, मनोज कुमार पासवान, शांति देवी एवं ज्योति देवी के नाम शामिल हैं। इनमें नए राशन कार्ड बनवाने तथा राशन कार्ड में नौ सदस्यों के नाम जोड़ने से संबंधित आवेदन शामिल हैं।अब सवाल यह है कि जब आम लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी स्तर पर सहयोग शिविर आयोजित किए जाते हैं, तो वहां संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और शिविर के नामित अध्यक्ष एवं प्रभारी की उपस्थिति क्यों सुनिश्चित नहीं की जाती? आवेदन देने के बाद भी लोगों को अपने काम की स्थिति जानने के लिए भटकना पड़े, तो ऐसे शिविरों की उपयोगिता पर सवाल उठना लाजिमी है।सवाल यह भी है कि जब जिला स्तर से नामित अधिकारी ही शिविर में भाग नहीं लेंगे और लंबित आवेदनों पर कोई जवाब नहीं मिलेगा, तो आखिर आम जनता को ऐसे शिविरों से क्या लाभ मिलेगा? सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित शिविर केवल औपचारिकता बनकर न रह जाएं, इसके लिए प्रशासन को जवाबदेही तय करनी होगी।








