महाराष्ट्र में नवरात्रि और गरबा आयोजनों में मुस्लिमों की एंट्री को लेकर विवाद के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस का बड़ा बयान सामने आया है।
अमृता फडणवीस ने कहा कि गरबा और नवरात्रि जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन सभी के लिए खुले होने चाहिए। अगर कोई व्यक्ति आस्था और भक्ति के साथ ऐसे आयोजन में शामिल होना चाहता है, तो सिर्फ धर्म या जाति के आधार पर उसके साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सुरक्षा के लिहाज से पहचान पत्र की जांच की जा सकती है, लेकिन किसी की पहचान को धर्म के आधार पर जांचना सही नहीं है। उनका यह बयान विश्व हिंदू परिषद की उस मांग के बीच आया है, जिसमें नवरात्रि के गरबा और डांडिया आयोजनों में मुस्लिमों की एंट्री पर रोक की बात कही गई थी।
अमृता फडणवीस ने खुद को इस बयान में राजनेता के बजाय सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक के तौर पर पेश किया। उनके बयान के बाद महाराष्ट्र में धार्मिक आयोजनों की भागीदारी और सामाजिक समरसता को लेकर बहस और तेज हो गई है।






