Home / News / शिक्षा के नाम पर लूट खसोट बर्दाश्त नहीं किताबें और यूनिफॉर्म को लेकर स्कूलों की…..

शिक्षा के नाम पर लूट खसोट बर्दाश्त नहीं किताबें और यूनिफॉर्म को लेकर स्कूलों की…..

सहारनपुर: नए शैक्षिक सत्र 2026-27 की शुरुआत के साथ ही जिलाधिकारी मनीष बंसल ने शिक्षा व्यवस्था में चल रही मनमानी और लूट पर बड़ा प्रहार किया है। लंबे समय से अभिभावकों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि अब स्कूल नियमों के तहत ही संचालित होंगे, न कि दबाव और मनमानी के आधार पर।
बैठक के दौरान डीएम बंसल ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी स्कूलों को अपना फीस स्ट्रक्चर 60 दिन पहले घोषित करना अनिवार्य होगा। इसके बावजूद करीब 60 स्कूलों द्वारा नियमों की अनदेखी पर डीएम ने कड़ा रुख अपनाते हुए 2 दिन का अल्टीमेटम दिया है। स्कूलों को अपनी वेबसाइट पर फीस का पूरा विवरण अपलोड करने और जिला विद्यालय निरीक्षक को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, अन्यथा सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
इसके साथ ही उन स्कूलों पर भी बड़ी कार्रवाई की तैयारी है, जो अभिभावकों को एक तय दुकान से किताबें, यूनिफॉर्म, जूते-मोजे खरीदने के लिए मजबूर करते थे। डीएम ने इसे सीधे तौर पर शोषण करार देते हुए कहा कि अब किताबें कई दुकानों और ऑनलाइन माध्यमों पर उपलब्ध होंगी, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम होगा।
यूनिफॉर्म को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है। अब स्कूल बिना ठोस कारण और समिति की अनुमति के 5 साल से पहले यूनिफॉर्म में बदलाव नहीं कर सकेंगे। इससे हर साल यूनिफॉर्म बदलने के नाम पर होने वाली अतिरिक्त वसूली पर रोक लगेगी।
इसके अलावा, हर स्कूल में “कठिनाई निवारण समिति” बनाना अनिवार्य किया गया है, ताकि छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों का समाधान सीधे और पारदर्शी तरीके से किया जा सके।
स्कूल वाहनों की सुरक्षा को लेकर भी डीएम ने जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है। इसके लिए एक नया पोर्टल लॉन्च किया गया है, जिसमें सभी स्कूल वाहनों का पंजीकरण और नियमित फिटनेस जांच अनिवार्य होगी।
यह पहल केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि डीएम मनीष बंसल द्वारा उठाया गया एक जनहित में बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है, जिसने साफ कर दिया है कि अब शिक्षा सेवा होगी, व्यवसाय नहीं।

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