अशोक कुमार श्रीवास की रिपोर्ट
कोरबा//कोरबा पावर लिमिटेड (अदानी) प्रबंधन के खिलाफ भू-विस्थापित मजदूर संघ (NFITU) का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। पांचवें वेतन समझौते और 70 हजार रुपये एक्सग्रेसिया बोनस को लेकर संघ ने प्रबंधन पर वादा खिलाफी, कर्मचारियों को गुमराह करने और श्रम कानूनों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।
संघ ने सहायक श्रमायुक्त को सौंपे पत्र में कहा है कि 4 अक्टूबर 2025 को हुई त्रिपक्षीय वार्ता में स्पष्ट सहमति बनी थी कि वर्ष 2025 का एक्सग्रेसिया बोनस 31 मार्च 2026 तक पांचवें वेतन समझौते के साथ दिया जाएगा। लेकिन समय गुजरने के बाद भी प्रबंधन ने न तो कोई ठोस बैठक की और न ही कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता दिखाई।
NFITU ने आरोप लगाया कि प्रबंधन जानबूझकर मामले को लटकाकर कर्मचारियों का शोषण कर रहा है। संघ का कहना है कि बार-बार निवेदन के बावजूद केवल खानापूर्ति के लिए बैठकें की गईं, जबकि असली मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं हुई। इससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी और आक्रोश है।
संघ ने यह भी आरोप लगाया कि प्रबंधन अपने पसंदीदा जूनियर एक्जीक्यूटिव और ठेकेदारों के साथ अलग से वेतन समझौते की प्रक्रिया चला रहा है, जबकि 51 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले भू-विस्थापित मजदूर संघ को नजरअंदाज किया जा रहा है। इसे संघ ने मजदूर हितों का खुला अपमान बताया है।
भू-विस्थापित मजदूर संघ के अध्यक्ष प्रवीण ओगरे ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “अगर 15 दिनों के भीतर पांचवें वेतन समझौते और एक्सग्रेसिया बोनस पर फैसला नहीं हुआ, तो पूरा मजदूर वर्ग सड़क पर उतरेगा। इसके बाद बिजली उत्पादन प्रभावित होता है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी अदानी प्रबंधन की होगी।”
संघ ने साफ कर दिया है कि अब मजदूर अपने हक के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।






