बरेली। बांग्लादेशी लेखिका, तस्लीमा नसरीन कलकत्ता में थी और उन्होंने एक प्रोग्राम में कहा की मदरसे आतंकवाद के अड्डे हैं। इस पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने कहा कि मदरसे चाहे भारत के हो चाहे पाकिस्तान के या बांग्लादेश के हूं ये सब अघोषित तौर पर आतंकवादियों के अड्डे हैं। इन दोनों के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्राध्यक्ष मौलाना शाहबुद्दीन रज़बी बरेलवी ने कहा कि मैं इन दोनों लोगों के बयानों की निंदा करता हूं। दरअसल मौर्य जी इतिहास से ना वाकिफ हैं। इन दोनों लोगों को मदरसों का इतिहास पढ़ना चाहिए और ये इतिहास उर्दू हिंदी अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध है। मौलाना ने आगे कहा के भारत की आज़ादी में मदरसों से संबंधित उलमा और छात्रों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। रुहिलखंड के बरेली से लेकर रामपुर मुरादाबाद बिजनौर अमरोहा मेरठ मुजफ्फरनगर सहारनपुर से लेकर दिल्ली तक जिन उलमा और छात्रों ने अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल
फूका था। उनकी लाशों के चट्टे लगे हुए थे और दिल्ली में दिल्ली गेट का हाल ये था कि वहां पर दिल्ली गेट के बराबर तक। लाशों के अंबार लगे हुए थे और ये सब अंग्रेजों ने इन मुसलमानों को शहीद कर दिया था। मदरसों के उलमा। और छात्रों ने अपनी जान का नजराना देश पर कुर्बान होकर पेश किया। हमें ये इतिहास बताता है। मगर अफसोस की बात है कि इन्हीं देश प्रेमियों पर सवाल खड़े किए जाते हैं। इन्हीं मदरसों पर आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए इलज़ामात लगाए जा रहे हैं। ये बहुत बड़ी शर्मनाक बात है के जिन मदरसों ने देश के गठन के लिए अपनी जान की कुर्बानियां दी हो। आज उन्हीं पर आतंकवाद के अड्डे होने की बात कही जा रही है। ये सारी बातें घोर निंदनीय हैं और सांप्रदायिक सोच पर आधारित है
मौलाना शाहबुद्दीन रज़बी। बरेलवी ने मजीद कहा कि मदरसों के उलमा हर रोज हर शहर की बड़ी बड़ी मस्जिदों के सीढ़ियों पर और खासतौर से दिल्ली की जामा मस्जिद में अवाम के दरम्यान आज़ादी का जोश भरने के लिए तकरीरें किया करते थे। और इनकलाब जिंदाबाद के नारे के साथ ही वंदे मातरम् के नारे भी लगाए जाते थे। लोगों में इन वलवला अंगेश तकरीरों के माध्यम से जंगे आज़ादी की रूह फूकी जाती थी। जिसका नतीजा यह हुआ के तन के गोरों और मन के कालों को साथ समंदर पार भेजने में कामयाबी हासिल हुई।





