अशोक कुमार श्रीवास की रिपोर्ट
पैसा लेकर मनमाने सीमांकन का आरोप, शासकीय भवनों की भूमि को लेकर विवाद; ग्रामीणों की मौजूदगी में दोबारा सीमांकन कराने की मांग
कोरबा//जनपद पंचायत कोरबा के अंतर्गत ग्राम पंचायत गेरांव में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। ग्राम पंचायत के सरपंच, उपसरपंच, पंचगण एवं ग्रामीणों द्वारा राजस्व निरीक्षक (RI) की कार्यशैली पर सवाल उठाए जाने के बाद मामला अब जिला प्रशासन तक पहुंच गया है। जनपद पंचायत कोरबा की अध्यक्ष श्रीमती बीजमोती राठिया ने ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर कलेक्टर कोरबा को पत्र लिखकर संबंधित राजस्व निरीक्षक के विरुद्ध उचित कार्रवाई करने की मांग की है। शिकायत में सीमांकन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया गया है कि ग्रामवासियों और पंचायत प्रतिनिधियों को सूचना दिए बिना मनमाने तरीके से जमीन का सीमांकन किया गया। साथ ही, सीमांकन के दौरान शासकीय भवनों की भूमि को लेकर भी विवाद की स्थिति निर्मित होने की बात कही गई है।
नवीन PDS भवन की भूमि को लेकर विवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत गेरांव में नवीन सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) भवन स्वीकृत हुआ है, जिसका निर्माण कार्य वर्तमान में प्रगति पर है। बताया गया है कि उक्त भवन खसरा नंबर 532 की भूमि पर दर्ज है। इस भूमि पर पूर्व में नाका क्वार्टर एवं सामुदायिक भवन का निर्माण भी हो चुका है।
इसी भूमि को लेकर वीर कुमारी किस्पोट्टा द्वारा तहसील कार्यालय में आपत्ति दर्ज कराए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद भूमि के सीमांकन और राजस्व अभिलेखों में दर्ज खसरा नंबरों को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया।
मामले में अब ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों ने सीमांकन की प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि भूमि की वास्तविक स्थिति और शासकीय निर्माणों की स्थिति स्पष्ट करने के लिए नियमानुसार सीमांकन कराया जाना आवश्यक है।
RI पर बिना सूचना सीमांकन करने का आरोप
जनपद पंचायत अध्यक्ष बीजमोती राठिया द्वारा कलेक्टर को लिखे गए शिकायत पत्र में राजस्व निरीक्षक श्रीमती करूणा मैत्री की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, दिनांक 14 अक्टूबर 2026 को खसरा नंबर 533 का सीमांकन कथित रूप से ग्रामवासियों, सरपंच, उपसरपंच, पंचगण और कोटवार को बुलाए बिना किया गया।
आरोप यह भी है कि सीमांकन के दौरान नाका क्वार्टर और सामुदायिक भवन को भी खसरा नंबर 533 में नाप दिया गया, जबकि पंचायत पक्ष इन निर्माणों की भूमि को लेकर अलग दावा कर रहा है।
शिकायत में संबंधित राजस्व निरीक्षक पर पैसे लेकर मनमाने तरीके से सीमांकन करने का आरोप भी लगाया गया है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच और राजस्व अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप—महीनों से कार्यालयों के चक्कर काट रहे
ग्राम पंचायत की सरपंच तेजमती और उपसरपंच कुंज बिहारी साहू का कहना है कि पंचायत क्षेत्र में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक राजस्व दस्तावेज प्राप्त करने में लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उनके अनुसार, शासकीय भूमि से संबंधित बी-1, नक्शा और खसरा जैसे दस्तावेजों के लिए महीनों से कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इसके बावजूद शासकीय भूमि का स्पष्ट चिन्हांकन नहीं किए जाने के कारण पंचायत के निर्माण कार्यों में बाधा उत्पन्न हो रही है।
पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि विकास कार्यों के लिए भूमि की स्थिति स्पष्ट होना बेहद जरूरी है। यदि समय पर सीमांकन और संबंधित दस्तावेजों की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं होती है, तो स्वीकृत निर्माण कार्यों के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब हो सकता है।
उन्होंने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस स्थिति से सरपंच, सचिव और ग्रामवासी परेशान हैं। उनका कहना है कि राजस्व संबंधी मामलों का निराकरण पारदर्शी तरीके से किया जाना चाहिए, ताकि ग्रामीणों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
जनपद अध्यक्ष ने कलेक्टर से की हस्तक्षेप की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए जनपद पंचायत कोरबा की अध्यक्ष श्रीमती बीजमोती राठिया ने कलेक्टर कोरबा को पत्र लिखकर संबंधित राजस्व निरीक्षक के विरुद्ध उचित कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने मांग की है कि विवादित भूमि का पुनः सीमांकन कराया जाए, ताकि खसरा नंबर 532 और 533 की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। साथ ही, सीमांकन की प्रक्रिया के दौरान ग्रामवासियों, सरपंच, सचिव और कोटवार की उपस्थिति सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है।
शिकायतकर्ता पक्ष का मानना है कि सभी संबंधित पक्षों की मौजूदगी में सीमांकन होने से भूमि की स्थिति को लेकर उत्पन्न भ्रम दूर होगा और भविष्य में किसी प्रकार का विवाद होने की आशंका भी कम होगी।
शिकायत की प्रतिलिपि एसडीएम और तहसीलदार को भी भेजी
जनपद अध्यक्ष द्वारा कलेक्टर को भेजे गए शिकायत पत्र की प्रतिलिपि अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, कोरबा तथा तहसीलदार, भैंसमा को भी प्रेषित की गई है। इससे स्पष्ट है कि पंचायत प्रतिनिधि इस मामले में राजस्व प्रशासन के उच्च अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कर उचित निराकरण चाहते हैं।
शिकायत के समर्थन में ग्रामीणों ने भी हस्ताक्षर किए हैं। इनमें विशेश्वर, तिलकराम, रामलाल, सरवन दास तथा कंछी कोटवार सहित अन्य ग्रामीणों के नाम शामिल बताए गए हैं। ग्रामीणों ने मामले की जांच कर उचित कार्रवाई किए जाने की मांग का समर्थन किया है।
निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
गेरांव का यह मामला अब केवल सीमांकन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इससे शासकीय भूमि के अभिलेखों, पंचायत के विकास कार्यों और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवाल भी सामने आए हैं।
यदि सीमांकन की प्रक्रिया में संबंधित पक्षों को सूचना नहीं दिए जाने या निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने की पुष्टि होती है, तो प्रशासन के लिए मामले की समीक्षा करना महत्वपूर्ण होगा। वहीं, पैसे लेकर मनमाने सीमांकन किए जाने के आरोप की सत्यता भी निष्पक्ष जांच के माध्यम से ही स्थापित हो सकती है।
अब ग्रामीणों की निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कलेक्टर कोरबा शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं और क्या विवादित भूमि का दोबारा सीमांकन सभी संबंधित पक्षों की उपस्थिति में कराया जाता है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि विवादित भूमि का निष्पक्ष पुनः सीमांकन कराया जाए, राजस्व अभिलेखों की जांच हो तथा शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
गेरांव में RI की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, जनपद अध्यक्ष ने कलेक्टर से की शिकायत






