मालेगांव 2008 बम धमाका मामले में NIA की विशेष अदालत ने 17 वर्षों बाद बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया है। इस फैसले ने जहां एक ओर कुछ लोगों को राहत दी है, वहीं पीड़ित परिवारों में गहरा आक्रोश और असंतोष व्याप्त है।
बरी किए गए प्रमुख नाम हैं:
- साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर
- लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित
- अजय राहिरकर
- सुधाकर चतुर्वेदी
- समीर कुलकर्णी
- रमजी कालसांगर
- लोकेश शर्मा
कोर्ट का तर्क
विशेष अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा। मामले में मजबूत साक्ष्य, स्थिर गवाह, और फॉरेंसिक पुष्टि की कमी रही।
पीड़ित परिवारों की प्रतिक्रिया
पीड़ितों के वकील शाहिद नदीम ने कहा:
“हम फैसले से असहमत हैं। अब हम उच्च न्यायालय और फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे।”
लियाकत शेख, जिन्होंने विस्फोट में अपने भाई को खोया, ने सवाल उठाया:
“अगर इन लोगों ने बम नहीं फोड़ा, तो फिर दोषी कौन है?”
पीड़ित परिवारों ने उच्च न्यायालय जाने का निर्णय लिया है। यह मामला अब न्याय प्रणाली, राजनीतिक हस्तक्षेप और धार्मिक पूर्वाग्रह जैसे मुद्दों को नए सिरे से उजागर कर रहा है।






