अशोक कुमार श्रीवास की खास रिपोर्ट नोनबिर्रा से
नोनबिर्रा, । Agragami Social Welfare Society (C.G.) के सहयोग तथा Commutiny – The Youth Collective, नई दिल्ली के तत्वावधान में संचालित SAMJHOTOH – The Samvidhan LIVE! Dialogues अभियान के अंतर्गत नोनबिर्रा के बनियापारा में परिवर्तन लैब यूथ ग्रुप द्वारा “बाल विवाह – सपने अधूरे” विषय पर मोहल्ला सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण समुदाय को बाल विवाह के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देना था।
सभा में लगभग 45 से 50 ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत युवाओं द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक और पोस्टर प्रदर्शनी से हुई, जिनके माध्यम से बाल विवाह के सामाजिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणामों को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया। नाटक में यह संदेश दिया गया कि कम उम्र में विवाह होने से बच्चों, विशेषकर बेटियों के सपने अधूरे रह जाते हैं और उनका भविष्य प्रभावित होता है।
सभा के दौरान वक्ताओं ने बताया कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की का विवाह कराना कानूनन अपराध है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह के कारण लड़कियों की पढ़ाई बीच में छूट जाती है, स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं और उनके आत्मनिर्भर बनने की संभावनाएँ भी प्रभावित होती हैं। इसलिए समाज को मिलकर इस कुप्रथा को समाप्त करने की दिशा में कार्य करना चाहिए।
कार्यक्रम में उपस्थित मितानिन गायत्री पटेल ने कहा,
“हमारे गांव की बेटियां पहले पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़ी होंगी। 18 वर्ष से पहले शादी करने से उनके सपने अधूरे रह जाते हैं। हम सब मिलकर बाल विवाह को रोकेंगे और हर घर की बेटियों को स्कूल भेजेंगे।”
उनके इस संदेश का उपस्थित ग्रामीणों ने समर्थन किया और बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता देने पर सहमति जताई।
कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित लोगों ने “पहले पढ़ाई, फिर शादी” का नारा लगाते हुए सामूहिक संकल्प लिया कि—
18 वर्ष से पहले किसी भी लड़की का विवाह नहीं किया जाएगा।
बेटियों को कम से कम 12वीं कक्षा तक शिक्षा दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
यदि कहीं बाल विवाह की जानकारी मिले तो उसकी सूचना 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन पर दी जाएगी।
परिवर्तन लैब यूथ ग्रुप के सदस्यों ने बताया कि समुदाय में जागरूकता बढ़ाने और बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने के उद्देश्य से भविष्य में भी नियमित रूप से ऐसी मोहल्ला सभाएँ, संवाद कार्यक्रम और जनजागरूकता अभियान आयोजित किए जाएंगे।
इस आयोजन के माध्यम से ग्रामीणों को यह संदेश दिया गया कि शिक्षित और सशक्त बेटियाँ ही समाज और देश के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं, इसलिए बाल विवाह को रोकना केवल कानूनी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व भी है।







