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चित्रकूट -ग्रीष्म ऋतु में गोआश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं के संबंध में डीएम ने की समीक्षा बैठक, गौशालाओं के गोवंश ग्रीष्म ऋतु में छोड़े नहीं जायेंगे डीएम

ब्यूरो संजय मिश्रा
चित्रकूट -जिलाधिकारी पुलकित गर्ग की अध्यक्षता में ग्रीष्म ऋतु को दृष्टिगत रखते हुए जनपद की गोशालाओं/गोआश्रय स्थलों से संबंधित आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा बैठक दिनांक 25 मार्च 2026 को सायं 07:00 बजे कैम्प कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, समस्त खण्ड विकास अधिकारी, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (चिकित्सा स्वास्थ्य), समस्त उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी तथा समस्त सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) उपस्थित रहे।बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जनपद की सभी गोआश्रय स्थलों में निर्माण संबंधी व्यवस्थाओं जैसे शेड, चरही, पेयजल की समुचित व्यवस्था, भूसा घर तथा विद्युत आपूर्ति आदि में यदि कोई कमी हो तो उसका शीघ्र निराकरण सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने कहा कि इस वर्ष ग्रीष्म ऋतु में गोवंशों को खुले में नहीं छोड़ा जाएगा, इसलिए गोआश्रय स्थलों के शेड को ठंडा रखने हेतु बोरा, शरपत, पुवाल आदि से कवर कराया जाए तथा शेड के अंदर स्प्रिंकलर की व्यवस्था कर नियमित रूप से पानी का छिड़काव कराया जाए। साथ ही विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करते हुए आवश्यकतानुसार पंखे आदि की व्यवस्था भी की जाए।
जिलाधिकारी ने गोवंशों हेतु पर्याप्त मात्रा में भूसा संग्रहण पर विशेष जोर देते हुए निर्देशित किया कि रबी फसल कटाई के दौरान माह अप्रैल से अभियान चलाकर किसानों से भूसा दान प्राप्त किया जाए तथा आवश्यकता अनुसार क्रय कर वर्ष भर के लिए सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि गोशालाओं में एकत्रित गोबर की खाद किसानों को उपलब्ध कराते हुए उसके बदले भूसा प्राप्त कर अधिक से अधिक भूसा संग्रहण किया जाए।
इसके अतिरिक्त गोवंशों हेतु हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रत्येक विकास खण्ड में कम से कम 50 हेक्टेयर सरकारी भूमि का चयन कर किसानों से अनुबंध कराया जाए तथा उस पर हरा चारा/नेपियर घास का उत्पादन कराया जाए। चारा उत्पादन करने वाले किसानों से चारा क्रय हेतु आवश्यक एमओयू भी संपादित किया जाए। साथ ही जनपद में उपलब्ध गोचर भूमि पर भी किसानों से अनुबंध कर हरा चारा/नेपियर का उत्पादन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी व्यवस्थाओं की नियमित मॉनिटरिंग करते हुए समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, जिससे ग्रीष्म ऋतु में गोवंशों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

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