बरभांठा नोनदरहा। ग्राम बरभांठा नोनदरहा स्थित सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के लिए शिक्षाप्रद एवं मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन किया गया। गतिविधि का मुख्य उद्देश्य बच्चों को खेल-खेल में विभिन्न रंगों की पहचान कराना और सीखने की प्रक्रिया को उनके लिए सरल, सहज एवं आनंददायक बनाना था। इस दौरान बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए लाल, पीला, हरा और नीला सहित विभिन्न रंगों के बारे में जानकारी प्राप्त की।
आंगनबाड़ी केंद्र में आयोजित गतिविधि के दौरान बच्चों को आसपास दिखाई देने वाली वस्तुओं और उनके रंगों से जोड़कर रंगों की पहचान कराई गई। कार्यकर्ताओं ने बच्चों को अलग-अलग रंगों के उदाहरण बताते हुए उन्हें रंग पहचानने के लिए प्रेरित किया। बच्चों से सवाल-जवाब किए गए और सही रंग पहचानने पर उनका उत्साहवर्धन भी किया गया। इससे बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ गतिविधियों में भाग लिया।
बाल गीतों के माध्यम से सीखने में बढ़ी रुचि
बच्चों को रंगों की जानकारी केवल मौखिक रूप से देने के बजाय बाल गीतों और बालगीताओं का सहारा लिया गया। गीत गाते हुए बच्चों ने रंगों के नाम दोहराए और गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की। मनोरंजक तरीके से सीखने के कारण बच्चों में किसी प्रकार की झिझक दिखाई नहीं दी और वे सहजता से रंगों को पहचानने का प्रयास करते नजर आए।
बाल गीतों के साथ सीखने की प्रक्रिया ने बच्चों के लिए गतिविधि को और रोचक बना दिया। गीतों की लय और सामूहिक सहभागिता के कारण बच्चे लंबे समय तक गतिविधि में जुड़े रहे। इस दौरान केंद्र का वातावरण भी उत्साह और उमंग से भरा रहा।
खेल और गतिविधियों से जल्दी सीखते हैं बच्चे
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुरीति पटेल ने बताया कि छोटे बच्चों को यदि केवल किताबों या पारंपरिक तरीके से पढ़ाया जाए तो कई बार उनका ध्यान जल्दी भटक जाता है। इसके विपरीत खेल, गतिविधियों और बाल गीतों के माध्यम से पढ़ाने पर बच्चे चीजों को जल्दी समझते हैं और उन्हें लंबे समय तक याद भी रखते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों की उम्र और उनकी रुचि को ध्यान में रखते हुए शिक्षण गतिविधियों को मनोरंजक बनाना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि रंगों की पहचान बच्चों के प्रारंभिक सीखने का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रंगों को पहचानने और उनमें अंतर समझने से बच्चों की अवलोकन क्षमता तथा आसपास की वस्तुओं को समझने की क्षमता विकसित होती है। इसी उद्देश्य से केंद्र में इस प्रकार की गतिविधियां नियमित रूप से आयोजित करने का प्रयास किया जा रहा है।
मानसिक और रचनात्मक विकास में सहायक
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रारंभिक बाल्यावस्था में खेल आधारित गतिविधियां बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। आंगनबाड़ी केंद्र में आयोजित इस गतिविधि से बच्चों में रंगों की पहचान के साथ-साथ मानसिक विकास, रचनात्मक सोच, एकाग्रता, स्मरण शक्ति और सीखने की क्षमता को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।
गतिविधि के दौरान बच्चों को स्वयं भाग लेने का अवसर मिलने से उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ा। सामूहिक रूप से गीत गाने और गतिविधियों में हिस्सा लेने से बच्चों में आपसी सहभागिता और सामाजिक व्यवहार विकसित करने में भी मदद मिली।
बच्चों में दिखा खासा उत्साह
पूरी गतिविधि के दौरान बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। बच्चे गीत गाते हुए रंगों के नाम दोहराते रहे और कार्यकर्ताओं द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देने के लिए उत्सुक नजर आए। गतिविधि के माध्यम से बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ मनोरंजन का भी अवसर मिला, जिससे सीखने की प्रक्रिया उनके लिए बोझिल न होकर आनंददायक बनी।
आंगनबाड़ी केंद्र की इस पहल को अभिभावकों ने भी सराहा। उनका कहना है कि बच्चों को यदि छोटी उम्र से ही इस तरह के रचनात्मक और मनोरंजक वातावरण में सीखने का अवसर मिले तो उनके व्यक्तित्व और बौद्धिक विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अभिभावकों ने ऐसी गतिविधियों को बच्चों के भविष्य के लिए लाभकारी बताते हुए नियमित रूप से आयोजित किए जाने की आवश्यकता जताई।
सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र में आयोजित यह गतिविधि इस बात का उदाहरण रही कि खेल, गीत और मनोरंजन के माध्यम से बच्चों को शिक्षा से जोड़कर सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ऐसी गतिविधियां बच्चों के लिए ज्ञान अर्जित करने के साथ-साथ आनंद, रचनात्मकता और सहभागिता का माध्यम भी बन रही हैं।
अशोक कुमार श्रीवास की खास रिपोर्ट












