अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की हालिया बैठक के बाद अमेरिका-चीन संबंधों में व्यापार और रणनीतिक स्थिरता को लेकर बातचीत आगे बढ़ी है। दोनों देशों ने अपनी व्यापारिक ट्रूस को जनवरी 2027 तक बढ़ाने पर सहमति जताई है, जबकि AI और अन्य रणनीतिक मुद्दों पर संवाद जारी रखने की बात सामने आई है।
इस घटनाक्रम पर भारत की भी नजर है। विश्लेषणों के मुताबिक, अमेरिका और चीन के बीच संबंधों में नरमी आने से एशिया की रणनीतिक तस्वीर प्रभावित हो सकती है। खास तौर पर व्यापार, रूस से तेल खरीद, महत्वपूर्ण खनिजों और इंडो-पैसिफिक से जुड़े मुद्दे भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं।
हालांकि, इसे सीधे तौर पर भारत के खिलाफ अमेरिका-चीन की किसी संयुक्त रणनीति के रूप में पेश करने के लिए अभी ठोस सार्वजनिक प्रमाण नहीं हैं। भारत ने इसी महीने नई दिल्ली में शी जिनपिंग के साथ अपनी द्विपक्षीय बातचीत में सीमा पर शांति, व्यापार असंतुलन और आपसी संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया था।
मुख्य बात: ट्रंप-जिनपिंग बैठक के बाद भारत के लिए सबसे अहम सवाल यह है कि अमेरिका-चीन रिश्तों में संभावित बदलाव का असर व्यापार, रूस से ऊर्जा आयात और एशिया की रणनीतिक स्थिति पर कितना पड़ता है।






