अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस साल के नोबेल शांति पुरस्कार की दौड़ में पिछड़ गए। ट्रंप लंबे समय से खुद को इस सम्मान का सबसे बड़ा हकदार मानते रहे हैं। उनका कहना था कि उन्होंने कई युद्धों को खत्म करवाने की दिशा में काम किया है और इसलिए यह सम्मान उन्हें मिलना चाहिए था। लेकिन जब नॉर्वे की नोबेल समिति ने उनका नाम घोषित नहीं किया, तो व्हाइट हाउस ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
बता दे की व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर स्टीवन चुइंग ने कहा कि नोबेल समिति ने एक बार फिर दिखा दिया कि वह शांति से ज़्यादा राजनीति को तरजीह देती है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अब तक कई संघर्षों को समाप्त करवाया है और आगे भी दुनिया में शांति स्थापित करने की दिशा में प्रयास करते रहेंगे। स्टीवन ने ट्रंप को एक ऐसे नेता के रूप में बताया जो मानवीय संवेदनाओं से भरे हैं और जीवन बचाने को अपना कर्तव्य मानते हैं।
साथ ही नोबेल समिति ने 2025 का शांति पुरस्कार वेनेजुएला की विपक्षी नेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता मारिया कोरिना मचाडो को देने की घोषणा की। पिछले दो दशकों से मारिया अपने देश में लोकतंत्र की बहाली और तानाशाही के खिलाफ संघर्ष कर रही हैं। समिति ने कहा कि आज जब दुनिया में तानाशाही बढ़ रही है और लोकतंत्र कमजोर पड़ रहा है, तब मारिया जैसी साहसी महिलाएं उम्मीद और परिवर्तन की प्रतीक बनती हैं।
रिपोर्ट:- कनक चौहान






