बरेली। बरेली के भाजपा विधायक एवं चिकित्सक डॉ. राघवेंद्र शर्मा के स्वामित्व वाले श्री रामगंगा हॉस्पिटल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में कथित तौर पर अस्पताल के बेसमेंट में मरीज भर्ती दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, भवन उपयोग के नियमों तथा सरकारी दिशा-निर्देशों के पालन को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, इस वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और अस्पताल प्रबंधन की ओर से भी अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
हाल के वर्षों में दिल्ली, लखनऊ और अन्य शहरों में अस्पतालों के बेसमेंट से जुड़े अग्निकांडों और हादसों के बाद सरकार ने अस्पतालों के लिए अग्नि सुरक्षा मानकों को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि बेसमेंट का उपयोग केवल स्वीकृत कार्यों के लिए किया जाए और मरीजों की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता न हो। ऐसे में श्री रामगंगा हॉस्पिटल का कथित वीडियो सामने आने के बाद लोगों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई है कि यदि वास्तव में बेसमेंट में मरीजों को भर्ती किया जा रहा है, तो क्या यह निर्धारित मानकों के अनुरूप है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को लेकर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोग मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि अस्पतालों में निर्धारित नियमों के विपरीत मरीजों को रखा जा रहा है, तो इसकी नियमित जांच और निरीक्षण की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की भी बनती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। किसी भी आपातकालीन स्थिति में मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालना सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। यदि किसी अस्पताल में बेसमेंट का उपयोग मरीजों के वार्ड के रूप में किया जा रहा है, तो यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि वहां पर्याप्त निकास मार्ग, अग्निशमन उपकरण, वेंटिलेशन, आपातकालीन अलार्म प्रणाली तथा अन्य सुरक्षा व्यवस्थाएं पूरी तरह उपलब्ध हों और संबंधित प्राधिकरण से आवश्यक अनुमति भी प्राप्त हो।
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वायरल वीडियो की अभी तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए केवल सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। मामले की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
उधर, स्वास्थ्य विभाग की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। यदि वीडियो में दिखाई गई स्थिति सही पाई जाती है, तो यह जांच का विषय होगा कि अस्पताल का नियमित निरीक्षण किस प्रकार किया गया और क्या भवन उपयोग एवं अग्नि सुरक्षा से जुड़े सभी नियमों का पालन सुनिश्चित किया गया था।
फिलहाल इस मामले में श्री रामगंगा हॉस्पिटल प्रबंधन, भाजपा विधायक एवं चिकित्सक डॉ. राघवेंद्र शर्मा तथा स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। उनके जवाब और संबंधित दस्तावेजों के सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। संबंधित पक्ष का बयान उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाएगा, ताकि पाठकों के सामने सभी तथ्यों के साथ संतुलित जानकारी प्रस्तुत की जा सके।






