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ऐतिहासिक कटहल नाला संवरेगा, 18.07 करोड़ की परियोजना का हुआ भूमि पूजन

कटहल नाला बनेगा “जूही चौपाटी”, परिवहन मंत्री ने किया शिलान्यास

सीएनडीएस के माध्यम से होगा कटहल नाला का विकास कार्य

प्राचीन राजाओं की धरोहर कटहल नाला अब नए रूप में आएगा सामने

(रिपोर्ट-नेहाल अख्तर)
(Express news bharat)
(जिला संवाददता बलिया)

बलिया। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने मंगलवार को जिले के ऐतिहासिक कटहल नाला के विकास एवं सुंदरीकरण कार्य का विधिवत भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर कुल 18.07 करोड़ रुपये (1807.20 लाख रुपये) की लागत आएगी।

परिवहन मंत्री ने कहा कि कटहल नाला ऐतिहासिक महत्व का नाला है, जिसका निर्माण प्राचीन काल में राजाओं द्वारा कराया गया था। यह नाला एशिया के प्रसिद्ध सुरहा ताल से जुड़ा हुआ है। सुरहा ताल लगभग 36 किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और 34 हेक्टेयर क्षेत्रफल में विस्तृत है। इतिहास में इसका विशेष महत्व रहा है, जहां स्नान करने से कुपोषण जैसी समस्याओं से मुक्ति मिलने की मान्यता रही है। उन्होंने बताया कि सुरहा ताल कटहल नाला के माध्यम से गंगा नदी से जुड़ता है। कटहल नाला अपनी विशेषता के लिए जाना जाता है, क्योंकि यह दोनों दिशाओं में बहने वाला एकमात्र नाला है। यह नाला बाढ़ से सुरक्षा करने के साथ-साथ एकत्रित बाढ़ के पानी को बाहर निकालने का भी कार्य करता है। लगभग 5 किलोमीटर लंबा यह नाला शहर के बीचों-बीच से होकर गुजरता है। साथ ही उन्होंने संकल्प लिया था कि शहर में जहां गंदगी है, वहीं से विकास की शुरुआत की जाएगी और कटहल नाला को “जूही चौपाटी” के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए बताया कि नाला के सौंदर्यीकरण के लिए लगभग 19 करोड़ रुपये तथा सिंचाई विभाग द्वारा सफाई कार्य के लिए 2 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इस कार्य को शीघ्र पूर्ण कर बलियावासियों को समर्पित किया जाएगा। नगर पालिका परिषद, बलिया की सीमा के अंतर्गत कटहल नाला के विकास एवं सौंदर्यीकरण के लिए प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। योजना के तहत प्रबंधापुर पुल से रामपुर महावल बैराज तक लगभग 2 किलोमीटर लंबाई में नाले का विकास एवं सुंदरीकरण किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत नाले के दोनों किनारों पर बोल्डर पिचिंग, जियो-सेल मेम्बरिंग सिस्टम, सरफेस पार्किंग, लैंडस्केपिंग एवं हार्टिकल्चर, बैरियर, फसाद निर्माण, सोलर लाइटिंग तथा मायावकी फॉरेस्ट जैसे कार्य कराए जाएंगे। इस कार्य को कार्यदायी संस्था यूपी जल निगम (नगरीय) की इकाई कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएनडीएस), आजमगढ़ के माध्यम से कराया जाएगा। इस परियोजना के पूर्ण होने से क्षेत्र में जल निकासी की समस्या से काफी हद तक राहत मिलेगी। बरसात के मौसम में होने वाले जलभराव से निजात मिलेगी और शहर को स्वच्छ, सुंदर एवं पर्यावरण के अनुकूल स्वरूप प्राप्त होगा।
प्रशासन ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि निर्माण कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप एवं निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए, ताकि आमजन को इस परियोजना का अधिकतम लाभ मिल सके।
भूमि पूजन कार्यक्रम में जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह, जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा, पूर्व मंत्री नारद राय सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे।

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