अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े कथित दानराशि गबन और अनियमितता मामले में जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। सूत्रों के अनुसार एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की तैयारी चल रही है। जांच में सामने आए तथ्यों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं और आने वाले दिनों में बड़े प्रशासनिक फैसले भी देखने को मिल सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय के करीबी माने जाने वाले टिन्नू यादव, लवकुश और अनुकल्प समेत पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की संभावना है। इन लोगों के यहां से कथित तौर पर नकदी बरामद होने की बात सामने आई है। एसआईटी ने पहले चरण में इन पांचों से 20 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की है।
जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि पूछताछ के दौरान अधिकांश सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं मिल सके। कई मामलों में विरोधाभासी और गोलमाल जवाब सामने आने से संदेह और गहरा गया है। हालांकि अंतिम फैसला एसआईटी की रिपोर्ट और शासन स्तर पर समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा।
इस बीच एक और मामला चर्चा में है। राम मंदिर निर्माण सहायक गोपाल राव के कर्नाटक जाने की खबरें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि वे रविवार सुबह विमान से कर्नाटक पहुंचे और एक कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले मुख्य अतिथि थे।
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों ने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है, क्योंकि जांच के दौरान जिन लोगों से पूछताछ की जा रही थी, उनके अयोध्या से बाहर जाने पर रोक लगाए जाने की चर्चा भी सामने आई थी।
उधर, राम मंदिर की व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले गोपाल राव को उनके पद से हटाए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। वर्ष 2022 से मंदिर निर्माण सहायक के रूप में कार्यरत गोपाल राव मंदिर ट्रस्ट में औपचारिक पद पर नहीं हैं, लेकिन व्यवस्थाओं में उनकी सक्रिय भूमिका रही है।
सूत्रों के अनुसार, बढ़ते विवाद और जांच के निष्कर्षों को देखते हुए ट्रस्ट के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी भी आने वाले महीनों में स्वास्थ्य या अन्य कारणों का हवाला देकर जिम्मेदारियों से अलग हो सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
बताया जा रहा है कि एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट लगभग 140 पन्नों की है, जिसमें वित्तीय रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, नियुक्तियों से जुड़े दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों का विस्तृत उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में कई गंभीर बिंदुओं को शामिल किए जाने की चर्चा है।
जांच के दायरे के लगातार बढ़ने के कारण एसआईटी अपनी जांच अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव भी सरकार को सौंप सकती है। प्रदेश सरकार ने प्रारंभिक जांच के लिए 15 दिन का समय दिया था, लेकिन अब कई नए पहलू सामने आने के कारण अतिरिक्त समय की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि प्रारंभिक रिपोर्ट सोमवार को प्रदेश सरकार को सौंपी जा सकती है। इसके बाद सरकार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और मंदिर की वित्तीय एवं प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय ले सकती है।






