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100 साल बाद बनेगा अद्भुत संयोग! एक साथ चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण – जानें क्यों है इतना खास

पितृपक्ष 2025 की शुरुआत 7 सितंबर से हो रही है और इस बार लगभग 100 साल बाद अद्भुत संयोग बन रहा है। ज्योतिष व खगोलविदों के अनुसार पितृपक्ष के दौरान चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण दोनों का योग होगा। 7 सितंबर की रात 9:57 बजे से 1:27 बजे तक साढ़े तीन घंटे का चंद्रग्रहण होगा, जिसका सूतक नौ घंटे पहले लग जाएगा। हालांकि इस दौरान श्राद्ध और तर्पण वर्जित नहीं होंगे, लेकिन सूतक शुरू होने से पहले ही ये कर्मकांड कर लिए जाएंगे।

वहीं, 21 सितंबर को पितृ विसर्जन के दिन सूर्यग्रहण लगेगा, जो रात 11 बजे से 22 सितंबर सुबह 3:24 बजे तक चलेगा। यह भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए सूतक मान्य नहीं होगा। सूर्यग्रहण कन्या राशि और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा, जिससे इसका ज्योतिषीय महत्व बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रहण का यह संयोग पितरों की शांति, श्राद्ध और तर्पण को विशेष फलदायी और प्रभावशाली बनाएगा।

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