उत्तराखंड के धराली गांव में आपदा से उजड़ चुके 98 परिवारों को प्रदेश सरकार ने पाँच-पाँच लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी है। ये चेक गंगोत्री क्षेत्र के विधायक सुरेश सिंह चौहान ने खुद पहुंचकर पीड़ित परिवारों को सौंपे — एक ऐसा पल, जहां आँसू और राहत साथ-साथ थे।
अब उम्मीद की एक और किरण धराली की धरती पर कदम रख चुकी है — राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (NGRI) की विशेषज्ञ टीम। उनके पास है एक ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (GPR), जो मलबे में दबे उन अपनों की तलाश करेगा, जिनका अब तक कोई सुराग नहीं मिला है।
यह वही तकनीक है जिसका इस्तेमाल NGRI ने फरवरी 2025 में तेलंगाना की एसएलबीसी सुरंग दुर्घटना में फंसे लोगों को खोजने के लिए किया था। अब वही तकनीक धराली में जीवन की अंतिम उम्मीद बनकर आई है।
GPR तकनीक, जो मिट्टी, कीचड़ और पानी के बीच भी मानव उपस्थिति का संकेत पकड़ सकती है, बचाव दल को बताएगी कि कहां ध्यान केंद्रित करना है। क्योंकि हर पल कीमती है, और हर जान अनमोल।
धराली में मलबे के नीचे शायद अब भी कुछ दिल धड़क रहे हों — और यही तलाश, यही राहत, उन्हें दोबारा रोशनी में लाने की कोशिश है।






