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विपक्ष का हंगामा: अखिलेश ने बैरिकेड्स लांघकर दिखाया दम, राहुल-प्रियंका समेत कई सांसद हिरासत में…

दिल्ली में सोमवार को एक अलग ही नज़ारा देखने को मिला। बिहार में मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों के खिलाफ विपक्षी सांसदों ने संसद भवन से चुनाव आयोग तक मार्च करने की कोशिश की लेकिन बीच रास्ते में ही उन्हें पुलिस ने रोक दिया।

विपक्षी नेता कह रहे थे, “हम सिर्फ अपनी बात शांतिपूर्वक रखने आए हैं।” लेकिन पुलिस ने मार्च की अनुमति न होने का हवाला देते हुए रास्ता बंद कर दिया। वहां बैरिकेड्स लगे थे, पुलिस तैनात थी और सांसदों से आगे न बढ़ने की अपील की जा रही थी।

जब सांसदों को रोका गया…

जैसे ही मार्च संसद से शुरू हुआ, नेता आगे बढ़ने लगे अखिलेश यादव ने बैरिकेड फांद दिया और सीधे सड़क पर जाकर धरने पर बैठ गए।
महुआ मोइत्रा, सुष्मिता देव, और अन्य महिला सांसद बैरिकेड्स पर चढ़ गईं और जोरदार नारेबाज़ी शुरू हो गई “वोट चोरी नहीं चलेगी”, “लोकतंत्र की हत्या बंद करो”। उनके हाथों में पोस्टर थे, सिर पर टोपी थी जिस पर लिखा था “एसआईआर = वोट चोरी”“हमें रोका क्यों जा रहा है?”

चुनाव आयोग की ओर से कहा गया था कि 30 सांसदों को आने की इजाजत है लेकिन विपक्ष का कहना था कि सभी सांसद मिलकर एक ज्ञापन देना चाहते थे, इसलिए किसी एक को चुनना उचित नहीं था।

राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, संजय राउत, जयराम रमेश, शशि थरूर इन सभी नेताओं को आखिरकार हिरासत में ले लिया गया।

पुलिस का कहना है कि वे उन्हें सुरक्षित तरीके से चुनाव आयोग तक पहुंचा सकते थे, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने तय नियम नहीं माने।

क्या बोले नेता?

  • राहुल गांधी ने कहा: “यह कोई पार्टी की लड़ाई नहीं है, यह देश के संविधान और हर नागरिक के वोट की रक्षा की लड़ाई है।”
  • प्रियंका गांधी बोलीं: “हम डरे नहीं हैं। लेकिन सरकार जरूर डर रही है, इसीलिए हमें रोक रही है।”
  • जयराम रमेश ने चुनाव आयोग को ‘चुराओ आयोग’ तक कह दिया, और आरोप लगाया कि उन्होंने उनके पत्र का जवाब तक नहीं दिया।

धरने में बेहोश हुईं सांसद

विरोध के बीच टीएमसी सांसद मिताली बाग की तबीयत बिगड़ गई और वो बेहोश हो गईं। पास मौजूद नेता तुरंत उनकी मदद के लिए आगे आए। सुप्रिया सुले ने कहा कि वे कोई हिंसा नहीं चाहते, वे सिर्फ अपनी बात कहना चाहते हैं “हम गांधीजी को अपना आदर्श मानते हैं।

आखिर मामला क्या है?

बिहार में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के नाम पर लाखों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की आशंका जताई जा रही है।
विपक्ष को डर है कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल जनता के वोट छीनने के लिए किया जा सकता है और यही कारण है कि संसद के दोनों सदनों में कई दिन से इस मुद्दे पर हंगामा हो रहा है।

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