बुधवार को हुई जीएसटी परिषद की बैठक में आम लोगों को राहत देने का मुद्दा इतना गर्माया कि चर्चा घंटों तक चलती रही। पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, केरल और पंजाब जैसे विपक्ष शासित राज्यों ने कर घटाने का विरोध करते हुए कहा कि राजस्व घाटे की भरपाई केंद्र सरकार करे। हालात तब और तनावपूर्ण हो गए जब मामला मतदान तक पहुंच गया। इसी दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया कि फैसला आज ही होगा, चाहे रातभर बैठना पड़े। उनके इस दबाव और तर्कों के आगे आखिरकार विपक्षी राज्यों का रुख नरम पड़ा और सहमति बन गई।
सत्ता पक्ष ने बताया तोहफा, विपक्ष ने साधा निशाना
निर्णय के बाद भाजपा ने इसे ऐतिहासिक सुधार बताते हुए कहा कि त्योहारों से पहले यह आम जनता के लिए एक बड़ा उपहार है। पार्टी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने दावा किया कि इससे हर वर्ग को राहत मिलेगी और कांग्रेस सिर्फ राजनीति कर रही है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार ने ‘एक राष्ट्र-एक कर’ का वादा तोड़ा और ‘एक राष्ट्र-नौ कर’ बना दिया। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने भी कहा कि दरों में यह सुधार स्वागत योग्य है, लेकिन सरकार को अपनी गलती समझने में पूरे आठ साल लग गए।






