बरेली। समाजवादी पार्टी की नई जिला कमेटी घोषित होने के बाद पार्टी के भीतर नाराजगी और खींचतान की चर्चाएं तेज हो गई हैं। नई कमेटी को लेकर आयोजित मनोनयन पत्र वितरण समारोह में सांसद समेत दोनों विधायक और कई पूर्व विधायक नजर नहीं आए। दिग्गज नेताओं की गैरमौजूदगी को लेकर पार्टी के अंदर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, नई जिला कमेटी में अध्यक्ष के साथ कुल 51 सदस्य होने की बात सामने आई है, जबकि बरेली में पहले 65 सदस्यीय कमेटी रही है। कमेटी की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर भी पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नई कमेटी को लेकर कुछ नेताओं में असंतोष है। वहीं, मनोनयन पत्र वितरण कार्यक्रम में पूर्व सांसद वीरपाल सिंह यादव समेत कई वरिष्ठ नेताओं की गैरमौजूदगी ने सवाल खड़े किए। पार्टी के अंदर इसे लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।
फरीदपुर में सबसे ज्यादा नाराजगी
नई जिला कमेटी को लेकर फरीदपुर क्षेत्र में सबसे ज्यादा नाराजगी बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार जिला सचिव पद से हटाए गए खालिद राणा द्वारा 3 सितंबर को पार्टी का व्हाट्सऐप ग्रुप छोड़ने के बाद सोशल मीडिया पर जिलाध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया। जिला उपाध्यक्ष मोहम्मद तारिक लिटिल और अरविंद भी मुखर बताए गए हैं।
वहीं, पूर्व ब्लॉक प्रमुख चंद्रसेन सागर ने फेसबुक पर पोस्ट के जरिए अपने विरोधियों को चेतावनी दी। रिपोर्ट के मुताबिक नई कमेटी में कई पुराने पदाधिकारियों को अलग-अलग भूमिकाओं में शामिल किया गया है, जबकि कुछ नामों को लेकर कार्यकर्ताओं में असंतोष की चर्चा है।
महिलाओं के बदले पति बने विशेष आमंत्रित सदस्य
नई कमेटी में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ महिला पदाधिकारियों के स्थान पर उनके पति को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाए जाने की चर्चा है। इससे पार्टी के भीतर महिला प्रतिनिधित्व और संगठन में पदों के चयन को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।
महापौर को लेकर सपा की चुप्पी चर्चा में
इसी बीच बरेली के महापौर डॉ. उमेश गौतम को लेकर सपा की स्थानीय राजनीति भी चर्चा में है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने महापौर पर कथित टिप्पणी की थी। रक्षा बंधन पर्व पर हुई घटना को लेकर कांग्रेस और आप ने विरोध प्रदर्शन भी किया था, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार सपा की स्थानीय टीम की ओर से इस मामले में अपेक्षाकृत खामोशी रही।
नगर निगम कार्यकारिणी में शामिल होने को लेकर भी महापौर की पसंद-नापसंद और सपा नेताओं के बीच समीकरण चर्चा का विषय बने हुए हैं।
कुल मिलाकर नई जिला कमेटी के गठन के बाद सपा में अंदरूनी असंतोष, वरिष्ठ नेताओं की दूरी और संगठनात्मक फैसलों को लेकर उठ रहे सवाल आने वाले दिनों में पार्टी के लिए चुनौती बन सकते हैं।






