बड़ा शोर सुनते थे पहलू में दिल का ।
जो चीरा तो एक क़तरा खून निकला”।
कावड़ जैसी बड़ी आस्था के साथ बड़ी कुर्बानी जरूरी है भारत के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालु जिनमें नौजवान, बूढ़े, बच्चे और औरतें अपने-अपने दिल में आस्थाओं का सैलाब लेकर और अपनी मन्नतों की पूर्ति के लिए हरिद्वार ऋषिकेश से गंगा का जल लेकर महादेव मंदिर मेरठ के पास शिवालियों में चढ़ाते हैं ताकि उनकी मनोकामना पूरी हो सके उनके परिवार को सुख शांति मिल सके मगर रास्ते में यही कावड़ी श्रद्धालु जब लठ बाजी करते है आते जाते लोगो को पीटते हैं कहीं पर कार तोड़ते हैं स्कूल बसें तोड़ते हैं चश्मे की दुकान तोड़ते हैं और जरा सी बात के ऊपर शायद अपनी सारी मर्यादाएं भूल जाते हैं यह कैसी श्रद्धा है और कैसी भक्ति। जबकि शंकराचार्य जी कहते हैं की कावड़ एक भक्ति है और भक्ति में किसी भी प्रकार का दूसरे का पकाया हुआ भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए मर्यादाओं को लांघने का तो सवाल ही नहीं होता वरना सब भक्ति बर्बाद हो जाती हैं अपनी इस तपस्या में कावड़ियों को एक चलती कीड़ी को भी तकलीफ नहीं पहुंचानी चाहिए। जो कावड़िया अपने आप को शंकर जी के प्रेम में पूरी लिप्त होने का दावा करते हैं वह इंसानों के साथ जब यह सब कृत्य करते हैं तो आश्चर्य के साथ शर्मिंदगी होती है सनातन क्या निहत्थे मुसाफिरों को मारने पीटने की इजाजत देता है जोकि निश्चय ही नहीं देता तो सनातन वालों को इन कुकृत्य का विरोध करना चाहिए। सरकार को भी आगामी कावड़ यात्रा के लिए हरिद्वार से मेरठ तक एक क्लास कॉरिडोर बना देना चाहिए की जो इस तरह का आयोजनों के लिए अस्थाई रूप से बन जाए और कांवड़ यात्रा के बाद उन पैनल को हटा लिया जाए इस से किसी प्रकार की दुर्घटना से कावड़ियों की हिफाज़त हो सकती हैं इसके अतिरिक्त सरकार को उपद्रव करने वाले उपद्रवी नौजवानों से सख्ती से निपटना चाहिए और कानून का पालन कराना चाहिए उपद्रव तो तभी रुक सकता है जब सरकार उपद्रवियों को सजा दे नहीं तो पुलिस भी और जनता दोनों पिटती रहेगी। कावड़ियों को भी सोचना चाहिए कि वह धर्म की यात्रा पर निकले हैं तो किसी को तकलीफ पहुंचा कर उन का धार्मिक लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता इसलिए शांति के साथ और सद्भाव के साथ अपनी यात्रा को पूर्ण करके सही धर्म के लक्ष्य की प्राप्ति करने की कोशिश करनी चाहिए वरना यह सारी कोशिश व्यर्थ ही जा रही है डीजे के सामने नाचना, नशा करना, हुड़दंग मचाना यह सब धार्मिक आडंबर हो सकता हैं धर्म का हिस्सा नहीं हो सकता ।
खुर्शीद अहमद सिद्दीकी, 37, प्रीति एनक्लेव, माजरा, देहरादून।






