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गरीब बच्चों के सपनों को पंख देने वाले शिक्षक राजेन्द्र कुमार कंवर की प्रेरक कहानी…

राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान के लिए चयनित राजेन्द्र कुमार कंवर का छात्रों, पालकों एवं ग्रामवासियों ने किया भव्य स्वागत
देवरमाल/कोरबा।
किसी शिक्षक की पहचान केवल इस बात से नहीं होती कि वह कक्षा में कितने घंटे पढ़ाता है, बल्कि इस बात से होती है कि उसके पढ़ाए हुए बच्चे जीवन में कितनी ऊंचाई तक पहुंचते हैं। कोरबा जिले के विकासखंड कोरबा अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला देवरमाल में पदस्थ सहायक शिक्षक एलबी राजेन्द्र कुमार कंवर की कहानी ऐसे ही शिक्षक की कहानी है, जिसने ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के सपनों को अपना सपना बनाया और सीमित संसाधनों के बीच शिक्षा को बदलाव का माध्यम बना दिया।
वर्ष 2007 में शिक्षक के रूप में पहली नियुक्ति पाने वाले राजेन्द्र कुमार कंवर ने नौकरी के शुरुआती दिनों में ही यह संकल्प लिया था कि वे बच्चों के लिए कुछ अलग और अनोखा कार्य करेंगे। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण परिवेश से आने वाले बच्चों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना उनका उद्देश्य रहा। आज लगभग दो दशक की उनकी शिक्षकीय यात्रा में अनेक उपलब्धियां जुड़ चुकी हैं और राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान 2026-27 के लिए उनका चयन इसी समर्पण और निरंतर प्रयासों की एक महत्वपूर्ण पहचान बन गया है।
पहली कोशिश में मिली असफलता, लेकिन हौसला नहीं टूटा
राजेन्द्र कुमार कंवर बताते हैं कि जब उन्होंने शिक्षक के रूप में अपनी यात्रा शुरू की, तब उनके मन में एक सपना था—ग्रामीण और गरीब परिवारों के बच्चों को ऐसी शिक्षा और मार्गदर्शन देना, जिससे वे बड़े अवसरों तक पहुंच सकें।
उन्होंने बच्चों को नवोदय विद्यालय जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने का प्रयास शुरू किया। शुरुआती दौर में अपेक्षित सफलता नहीं मिली। वर्ष 2007 में किसी बच्चे का नवोदय विद्यालय में चयन नहीं हो सका। यह स्थिति किसी भी शिक्षक के लिए निराशाजनक हो सकती थी, लेकिन कंवर ने इसे असफलता के रूप में स्वीकार करने के बजाय अपनी तैयारी और मेहनत को और मजबूत करने का निर्णय लिया।
फिर आया वर्ष 2010, जिसने उनके प्रयासों को नई दिशा दी। इस वर्ष उनके पढ़ाए हुए तीन बच्चों का नवोदय विद्यालय में चयन हुआ। यही सफलता उनके लिए प्रेरणा का turning point बनी। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
लगातार मेहनत, बच्चों को अतिरिक्त समय देकर पढ़ाना और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन देना उनकी कार्यशैली का हिस्सा बनता गया। नवोदय विद्यालय के साथ-साथ एकलव्य विद्यालय जैसी संस्थाओं में भी बच्चों के चयन के लिए उन्होंने लगातार प्रयास किए।
बच्चों की सफलता बनी शिक्षक की सबसे बड़ी खुशी
राजेन्द्र कुमार कंवर के लिए बच्चों की सफलता केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं है। वे मानते हैं कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे भी प्रतिभा में किसी से कम नहीं होते, जरूरत है तो केवल सही मार्गदर्शन, अवसर और निरंतर प्रोत्साहन की।
इसी सोच के साथ उन्होंने विद्यालय के बच्चों के लिए निःशुल्क कोचिंग कक्षाएं भी शुरू कीं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को निजी कोचिंग का खर्च उठाना न पड़े, इसके लिए उन्होंने स्वयं अतिरिक्त समय देकर उन्हें पढ़ाया और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई।
उनका मानना है कि शिक्षक यदि बच्चों की क्षमता को पहचान ले और उन्हें सही दिशा दिखाए तो सामान्य परिस्थितियों में पढ़ने वाला बच्चा भी असाधारण उपलब्धि हासिल कर सकता है।
2017 में स्मार्ट क्लास की पहल
राजेन्द्र कुमार कंवर ने समय के साथ शिक्षा में बदलती तकनीक की आवश्यकता को भी समझा। वर्ष 2017 में स्मार्ट क्लास के संचालन की पहल की गई। ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालय में आधुनिक तकनीक के माध्यम से बच्चों को पढ़ाने का यह प्रयास अपने आप में महत्वपूर्ण था।
इसके बाद वर्ष 2018 में जिला शिक्षा अधिकारी के सहयोग से कंप्यूटर संस्था की स्थापना की गई। इस पहल में जनसमुदाय का सहयोग भी लिया गया। ग्रामीणों ने भी विद्यालय के विकास में अपनी भागीदारी निभाई।
कंवर की सोच केवल कक्षा और पाठ्यपुस्तक तक सीमित नहीं रही। उन्होंने विद्यालय के बच्चों के लिए अलमारी, डेस्क-टेबल सहित आवश्यक सुविधाएं जुटाने के लिए भी प्रयास किए। विद्यालय की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्होंने जनसमुदाय और संबंधित अधिकारियों से सहयोग लिया और कई कार्यों में स्वयं भी सक्रिय भूमिका निभाई।
विद्यालय को केवल भवन नहीं, सीखने का बेहतर वातावरण बनाने की कोशिश
शासकीय प्राथमिक शाला देवरमाल में वर्तमान में लगभग 100 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। ग्रामीण परिवेश के इन बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना कंवर की प्राथमिकताओं में रहा है।
वे मानते हैं कि विद्यालय केवल किताब पढ़ने की जगह नहीं, बल्कि बच्चे के व्यक्तित्व निर्माण का केंद्र है। इसलिए बच्चों में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए भी विभिन्न गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही।
शासन की योजनाओं और निर्देशों का पालन करते हुए स्वच्छता रैली, ‘एक पेड़ मां के नाम’ सहित विभिन्न जागरूकता गतिविधियों में बच्चों को जोड़ा गया। इस तरह शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय उसे जीवन से जोड़ने का प्रयास किया गया।
जब समुदाय ने विद्यालय को अपना माना
कंवर की कार्यशैली की एक विशेषता यह भी रही कि उन्होंने विद्यालय के विकास में समुदाय की भागीदारी को महत्व दिया। कंप्यूटर सुविधा सहित कई आवश्यक संसाधनों के लिए जनसमुदाय का सहयोग लिया गया।
इससे विद्यालय और ग्रामीणों के बीच संबंध मजबूत हुए। पालकों को भी यह महसूस हुआ कि विद्यालय केवल शिक्षक और बच्चों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे गांव की साझा जिम्मेदारी है।
यही कारण है कि जब राजेन्द्र कुमार कंवर का राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान 2026-27 के लिए चयन हुआ, तो यह खुशी केवल उनके परिवार या विद्यालय परिवार तक सीमित नहीं रही। पूरा देवरमाल गांव इस उपलब्धि को अपनी उपलब्धि मानकर उत्साहित दिखाई दिया।
सम्मान की खबर पर गांव में खुशी
राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान के लिए चयनित होने के बाद शासकीय प्राथमिक शाला देवरमाल में छात्रों, पालकों, शिक्षकों एवं ग्रामवासियों द्वारा राजेन्द्र कुमार कंवर का आत्मीय स्वागत किया गया।
विद्यार्थियों और पालकों ने उन्हें पुष्पमाला पहनाकर तथा पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया। ग्रामीणों ने उनके कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के एक शिक्षक का राज्य स्तर पर सम्मान के लिए चयन होना पूरे गांव और क्षेत्र के लिए गौरव की बात है।
कार्यक्रम में देवरमाल के सरपंच लाल सिंह कंवर ने शिक्षक राजेन्द्र कुमार कंवर को बधाई देते हुए कहा कि किसी शिक्षक का राज्य स्तरीय सम्मान के लिए चयन होना पूरे गांव के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के समर्पण से ही विद्यार्थियों का भविष्य बेहतर बनता है और ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षक का राज्य स्तर पर चयन दूसरे शिक्षकों तथा विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का काम करेगा।
प्रधान पाठक ने कहा—शिक्षक केवल पाठ नहीं पढ़ाता, भविष्य बनाता है
देवरमाल के प्रधान पाठक प्रशांत विश्वकर्मा ने भी राजेन्द्र कुमार कंवर को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और भविष्य का निर्माण करना भी है।
उन्होंने कंवर की उपलब्धि को विद्यालय परिवार के लिए विशेष खुशी का अवसर बताते हुए उनके कार्यों की सराहना की।
कार्यक्रम में विजय पटेल, उरगा के पूर्व सरपंच जनार्दन सिंह कंवर सहित जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने भी शिक्षक कंवर को बधाई दी। उपस्थित लोगों ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को मिलने वाला सम्मान समाज में शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उपलब्धियों के पीछे है वर्षों की निस्वार्थ मेहनत
राजेन्द्र कुमार कंवर की उपलब्धि को यदि केवल एक पुरस्कार के रूप में देखा जाए तो उनकी कहानी अधूरी रह जाएगी। यह सम्मान वास्तव में उनके उन वर्षों के प्रयासों की पहचान है, जब उन्होंने ग्रामीण बच्चों के लिए अतिरिक्त समय दिया, असफलताओं से सीख ली और संसाधनों की कमी को बच्चों की राह में बाधा नहीं बनने दिया।
2007 में शिक्षक के रूप में शुरुआत, शुरुआती असफलता, 2010 में तीन बच्चों का नवोदय चयन, उसके बाद लगातार बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करना, स्मार्ट क्लास की शुरुआत, कंप्यूटर शिक्षा की पहल, विद्यालय में आवश्यक संसाधन जुटाना और निःशुल्क कोचिंग जैसी पहलें उनकी शिक्षकीय यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव हैं।
‘बच्चों के लिए कुछ बेहतर करना है’—आज भी वही संकल्प
राजेन्द्र कुमार कंवर अपनी उपलब्धि का श्रेय अकेले स्वयं को नहीं देते। वे विद्यालय के सहयोगी शिक्षकों, पालकों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण समुदाय के सहयोग को भी महत्वपूर्ण मानते हैं।
उनका कहना है कि जब उन्होंने शिक्षक के रूप में कदम रखा था, तब उनके मन में एक ही सपना था कि वे बच्चों के लिए कुछ अलग करें और विशेषकर गरीब एवं ग्रामीण बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर दें। शुरुआती असफलताओं के बावजूद उन्होंने अपना प्रयास जारी रखा और धीरे-धीरे बच्चों की सफलता ने उनके विश्वास को मजबूत किया।
राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान के लिए चयन के बाद भी उनका संकल्प समाप्त नहीं हुआ है। वे आने वाले समय में भी बच्चों के लिए बेहतर कार्य करने की बात कहते हैं।
देवरमाल से निकली प्रेरणा की कहानी
आज शासकीय प्राथमिक शाला देवरमाल के करीब 100 बच्चों के बीच राजेन्द्र कुमार कंवर की मौजूदगी केवल एक शिक्षक के रूप में नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक और प्रेरणा स्रोत के रूप में देखी जाती है।
उनकी कहानी यह संदेश देती है कि शिक्षा में बदलाव के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती। यदि शिक्षक के भीतर बच्चों के भविष्य को लेकर जुनून, समर्पण और निरंतर प्रयास करने की इच्छाशक्ति हो तो सीमित संसाधनों में भी बड़े परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान के लिए उनका चयन इसी यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है। एक ग्रामीण विद्यालय से शुरू हुई यह कहानी अब पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन रही है।
राजेन्द्र कुमार कंवर का सम्मान केवल एक शिक्षक का सम्मान नहीं, बल्कि उन ग्रामीण बच्चों के सपनों का सम्मान है, जिन्हें उन्होंने आगे बढ़ने का हौसला दिया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने शिक्षक राजेन्द्र कुमार कंवर के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान प्राप्त करने के लिए अग्रिम शुभकामनाएं दीं। ग्रामवासियों ने कहा कि उनकी यह उपलब्धि देवरमाल के लिए गौरव का विषय है और इससे क्षेत्र के अन्य शिक्षक एवं विद्यार्थी भी बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित होंगे।
उपस्थित रहे
इस अवसर पर ओम प्रकाश साहू, राजेन्द्र कुर्रे, राजेन्द्र भारद्वाज, प्रमिला, अतिथि शिक्षक हेमलता कंवर, खगेश्वर चौहान, साध खरे, ब्यासनारायण पटेल, उमा देवी खरे, संतरा बाई, अनिकेत, नंदनी कंवर (कार्यकर्ता), हीरा भारद्वाज, स्मृति पटेल एवं शिक्षिका फिलोमिना एक्का सहित बड़ी संख्या में छात्र, पालक एवं ग्रामवासी उपस्थित रहे।
देवरमाल की यह कहानी बताती है कि जब शिक्षक बच्चों की सफलता को अपनी सफलता मान लेता है, तो एक छोटा सा ग्रामीण विद्यालय भी बड़े सपनों की पाठशाला बन सकता है।
अशोक कुमार श्रीवास की खास रिपोर्ट

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