बहेड़ी, बरेली के हिंदी शिक्षक और कवि डॉ. रजनीश गंगवार ने 12 जुलाई की सुबह स्कूल की असेंबली में एक कविता पढ़ी। कविता के कुछ प्रमुख अंश थे:
“तुम कांवड़ लेने मत जाना, ज्ञान का दीप जलाना…
कांवड़ से बुद्धि‑विवेक का तनिक विकास न होगा…
टीचर ने क्या कहा?
सरकार पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि “सरकार पाखंड को बढ़ावा दे रही है, स्कूल बंद कर शराब की दुकानें खोल रही है” और कहा कि बुद्धिजीवियों को विरोध करना चाहिए जब कुछ नेता कांवड़ पर टिप्पणी कर जाते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, लेकिन शिक्षक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया
शिक्षा विभाग के पास भी आंतरिक जांच चल रही है – संभव है कि अगले कुछ दिनों में टीचर पर प्रशासनिक कार्रवाई (जैसे निलंबन) हो सकती है ।
राजनीतिक बहस तेज़ हो सकती है: यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह धर्म, अभिव्यक्ति की आज़ादी और शिक्षा से जुड़ा है।






