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ऊर्जा निगमों में सर्जिकल स्ट्राइक सालों से जमे अधिकारियों की आखिरकार छुट्टी…..

देहरादून:
ऊर्जा विभाग में हाल ही में हुए बड़े फेरबदल को केवल एक प्रशासनिक बदलाव के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे लंबे समय से जमे अधिकारियों के खिलाफ देर से हुई लेकिन जरूरी कार्रवाई माना जा रहा है। Uttarakhand Power Corporation Ltd. (UPCL) और Uttarakhand Jal Vidyut Nigam Limited (UJVNL) के शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारी काफी समय से अपनी कुर्सियों पर बने हुए थे और उनके कामकाज को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं।
सूत्रों के अनुसार, इन अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर विभाग के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर नाराज़गी थी। बिजली व्यवस्था, परियोजनाओं की धीमी रफ्तार और निर्णय लेने में देरी जैसे मुद्दों पर सवाल उठते रहे, लेकिन इसके बावजूद लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे यह धारणा बन गई थी कि कुछ अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से ज्यादा अपनी कुर्सी बचाने में लगे हुए हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी भी संवेदनशील विभाग में लंबे समय तक एक ही नेतृत्व का बने रहना कई बार कार्यकुशलता को प्रभावित करता है। नए विचारों और जवाबदेही की कमी से सिस्टम में ठहराव आ जाता है, जिसका सीधा असर आम जनता और सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ता है।
इन अधिकारियों को सेवानिवृत्ति के बाद भी सेवा विस्तार दिया गया था, लेकिन विस्तार अवधि के दौरान भी प्रदर्शन को लेकर सवाल खत्म नहीं हुए। यही वजह रही कि अंततः शिकायतों का दबाव इतना बढ़ा कि उन्हें तय समय से पहले ही पद से हटाना पड़ा।
यह पूरा घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि केवल पद पर बने रहना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि निरंतर प्रदर्शन और पारदर्शिता भी उतनी ही जरूरी है। अगर समय रहते कार्यशैली में सुधार नहीं किया जाए, तो देर-सवेर जवाबदेही तय होना तय है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नए जिम्मेदार अधिकारी विभाग में कितनी तेजी से सुधार ला पाते हैं और क्या वे जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे या नहीं।

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