उत्तर प्रदेश के अफजलगढ़ के सलावतनगर गांव में दिल को दहला देने वाला मंजर सामने आया। 65 वर्षीय मुन्नी देवी को आवारा कुत्तों के झुंड ने खेत में नोच-नोच कर मार डाला। महिला अकेले खेत में धान की निराई कर रही थीं, तभी झुंड ने उन पर हमला कर दिया। कुत्तों ने उनके सिर के बाल तक नोच डाले, हाथ-पैर फाड़ दिए, और चीखने-चिल्लाने के बावजूद कोई मदद नहीं पहुंच सकी।शोर सुनकर जुटे ग्रामीण भी कुत्तों की वहशी हालत देख घबरा गए, और कोई उन्हें बचाने की हिम्मत नहीं जुटा सका। जब लाठी-डंडों से कुत्तों को भगाया गया, तब तक महिला की सांसें थम चुकी थीं। मौका इतना डरावना था कि उनकी बहू वहीं पहुंचते ही दहशत में बेहोश होकर गिर पड़ी।ग्रामीणों ने बताया कि इलाके में आवारा कुत्तों का आतंक चरम पर है, और वे रोजाना 15 से 20 लोगों को काट रहे हैं। खासकर बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग इनके आसान शिकार बन रहे हैं। लोगों का घर से निकलना दूभर हो गया है।
डेढ़ महीने पहले भी पास के गांव में सात साल की बच्ची यास्मीन की जान कुत्तों के हमले में चली गई थी, जब वह मां के साथ दूध लेने गई थी।स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट चौंकाने वाली है। जनवरी से 20 जुलाई तक सीएचसी और पीएचसी में कुल 1575 लोगों को एंटी रेबीज इंजेक्शन दिए जा चुके हैं, जबकि 200 से अधिक को जिला अस्पताल रेफर करना पड़ा है।सीएचसी अधीक्षक डॉ. सर्वेश निराला ने बताया कि कुत्ते के काटने पर घाव को 30 मिनट तक धोना और 24 घंटे के भीतर एंटी रेबीज लगवाना बेहद जरूरी है, ताकि जान का खतरा टाला जा सके।इलाके में डर, गुस्सा और शोक का माहौल है। लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि कुत्तों के कहर से उन्हें जल्द राहत मिले, वरना और जानें जा सकती हैं।






